उत्तराखंड

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद बीकेटीसी सख्त, बदरीनाथ-केदारनाथ समेत सभी मंदिरों में दान प्रबंधन को लेकर जारी हुए नए निर्देश

देहरादून: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और गबन के मामले के सामने आने के बाद श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने बड़ा कदम उठाया है। समिति ने अपने अधीन संचालित सभी मंदिरों में दान, चढ़ावे और अन्य आय के स्रोतों के प्रबंधन को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश में दान और चढ़ावे के संग्रह, सुरक्षा और लेखा-जोखा में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

दान और चढ़ावे के प्रबंधन में नहीं होगी लापरवाही

 

बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह ने गुरुवार को जारी आदेश में बदरीनाथ, केदारनाथ समेत समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों के दान गणना केंद्र, लेखा शाखा, ट्रेजरी सेक्शन, अतिथि गृह और पूजा काउंटरों पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। आदेश में साफ कहा गया है कि नकद दान, चढ़ावे या दान में मिली सामग्री के प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या वित्तीय अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

अयोध्या प्रकरण के बाद बढ़ी सतर्कता

 

बीकेटीसी का यह निर्णय अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले के बाद लिया गया है। हाल ही में इस मामले की जांच कर रही एसआईटी ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के घरों से लाखों रुपये की नकदी बरामद हुई है। मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और बुलडोजर एक्शन की तैयारी में जुटे हैं।

 

13 जून को गठित हुई थी एसआईटी

 

राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी और 25 जून को एफआईआर दर्ज कर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

 

6 जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें

 

सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 6 जुलाई को अयोध्या में होने वाली बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के भविष्य पर फैसला लिया जा सकता है। वहीं, बीकेटीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड के मंदिरों में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में किसी भी तरह की अनियमितता रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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