राजमार्ग, अस्पताल और शिक्षण संस्थानों के पास शराब की दुकानें हटेंगी? हाईकोर्ट ने दिए अहम निर्देश

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों तथा आवासीय क्षेत्रों के पास संचालित शराब की दुकानों को लेकर दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि जहां भी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं, वहां संबंधित जिलाधिकारी को नया प्रत्यावेदन दिया जाए। जिलाधिकारी छह सप्ताह के भीतर मामले की सुनवाई कर नियमानुसार निर्णय लें।
हाईकोर्ट ने याचिका का किया निस्तारण
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में नियमों के उल्लंघन की अलग-अलग शिकायत संबंधित जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें, जिस पर निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई की जाए।
संवेदनशील स्थानों पर शराब की दुकानों का आरोप
जनहित याचिका नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट की ओर से दायर की गई थी। ट्रस्ट का कहना था कि 26 और 27 जून को हरिद्वार में किए गए निरीक्षण के दौरान कई शराब की दुकानें अस्पतालों, स्कूलों और आवासीय क्षेत्रों के निकट संचालित होती मिलीं। याचिका में दावा किया गया कि भूमानंद अस्पताल और विजडम ग्लोबल स्कूल के करीब भी शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं। इसके अलावा कई आवासीय कॉलोनियों में भी नियमों के विपरीत शराब की बिक्री की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला
याचिकाकर्ता ने बताया कि वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से 500 मीटर के भीतर शराब की दुकानें नहीं होंगी। साथ ही अस्पताल, शिक्षण संस्थान, मंदिर और आवासीय क्षेत्रों के निकट भी शराब की दुकानें संचालित नहीं की जाएंगी। इसके बावजूद कई स्थानों पर आदेशों का पालन नहीं हो रहा है।
सरकार को पहले भी भेजा गया था प्रत्यावेदन
याचिकाकर्ता का कहना था कि इस संबंध में मुख्य सचिव, आबकारी सचिव, जिलाधिकारियों, पुलिस महानिदेशक और आबकारी आयुक्त को पहले भी प्रत्यावेदन भेजा गया था, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी।
छह सप्ताह में निर्णय के निर्देश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित जिलाधिकारी नए प्रत्यावेदन प्राप्त होने के बाद छह सप्ताह के भीतर सभी तथ्यों की जांच कर कानून के अनुसार निर्णय लें। इससे नियमों के विपरीत संचालित शराब की दुकानों पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।



