ठाकुरपुर में हादसे के बाद 45 मिनट तड़पते रहे घायल, मौके पर मौजूद थी परिवहन विभाग की टीम, टीम की भूमिका पर उठे सवाल

देहरादून: सड़क हादसे में घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी ‘गोल्डन आवर’ में घायल को अस्पताल पहुंचाने और उसकी जान बचाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग लोगों को ‘गुड सेमेरिटन’ यानी ‘राह-वीर’ बनने के लिए जागरूक कर रहा है। लेकिन बुधवार सुबह प्रेमनगर के ठाकुरपुर में सामने आई एक घटना ने विभाग की अपनी व्यवस्था और कर्मचारियों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए।
आरोप है कि दो बाइकों की टक्कर के बाद घायल सड़क पर करीब 45 मिनट तक पड़े रहे, जबकि मौके के पास ही परिवहन विभाग की इंटरसेप्टर मौजूद थी। शिकायत के मुताबिक, विभागीय कर्मचारियों ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के बजाय दोनों पक्षों को आपसी समझौता करने की सलाह दी। बाद में घायल के परिजन मौके पर पहुंचे और उन्हें अस्पताल ले गए।
दो बाइकों की टक्कर में तीन लोग घायल
जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 10 बजे ठाकुरपुर क्षेत्र में दो बाइक आपस में टकरा गईं। हादसे में बाइक सवार जयदीप गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं दूसरी बाइक पर सवार दो युवक भी घायल हुए। बताया गया कि दोनों युवक एक निजी कॉलेज के छात्र हैं।
टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों बाइक क्षतिग्रस्त हो गईं। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।
परिवहन विभाग के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप
घटना को लेकर आरोप है कि मौके पर पहुंचे परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने दुर्घटना की स्थिति देखी, लेकिन घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की पहल नहीं की। शिकायत के अनुसार, कर्मचारियों ने दोनों पक्षों को आपस में सुलह कर मामला खत्म करने की सलाह दी।
इस दौरान घायल करीब पौन घंटे तक मौके पर ही पड़े रहे। बाद में परिजन मौके पर पहुंचे और घायलों को प्रेमनगर अस्पताल ले गए।
मामले की शिकायत आरटीओ प्रवर्तन डॉ. अनीता चमोला से की गई है। शिकायत मिलने के बाद उन्होंने प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं।
‘गोल्डन आवर’ बचाने की सीख, लेकिन मौके पर क्या हुआ?
परिवहन विभाग की ‘राह-वीर’ योजना का उद्देश्य सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को तत्काल मदद उपलब्ध कराना और उसे गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल या ट्रॉमा केयर सेंटर तक पहुंचाना है।
ऐसे में ठाकुरपुर की घटना को लेकर सवाल उठ रहा है कि जब विभाग के कर्मचारी हादसे के पास मौजूद थे और इंटरसेप्टर भी मौके पर खड़ी थी, तो घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की पहल क्यों नहीं की गई।
घायल की मदद करने पर 25 हजार रुपये का पुरस्कार
उत्तराखंड परिवहन विभाग की योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की तत्काल सहायता कर उसे गोल्डन आवर में अस्पताल या ट्रॉमा केयर सेंटर पहुंचाने और उसकी जान बचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है।
इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में गठित समिति के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जाती है।
अब ठाकुरपुर की घटना की जांच में यह स्पष्ट होगा कि मौके पर मौजूद परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने घायलों की मदद क्यों नहीं की और क्या उन्होंने अपने विभागीय दायित्वों का पालन किया था। घटना ने एक तरफ ‘राह-वीर’ अभियान की जरूरत को सामने रखा है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी अमले की जवाबदेही और संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।



