
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किए जाने की मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने बुधवार को विधानसभा भवन के निकट एक दिवसीय विशाल धरना आयोजित किया। इस धरने का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने किया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।
सरकार पर गुमराह करने का आरोप
धरने को संबोधित करते हुए गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर सरकार स्पष्ट नीति नहीं अपना रही है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
हरीश रावत का केंद्र पर निशाना
इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण बिल के समर्थन में रही है और आगे भी मजबूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि परिसीमन की समस्या को हल कर तुरंत लोकसभा का सत्र बुलाया जाए और बिल पारित किया जाए।
हरीश रावत ने यह भी घोषणा की कि बृहस्पतिवार को कांग्रेस महिला आरक्षण बिल लागू करने की मांग को लेकर विधानसभा के सामने एक और धरना देगी।
33 प्रतिशत आरक्षण की मांग
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि वर्ष 2027 से लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा की वर्तमान संख्या के आधार पर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
नेताओं का कहना है कि कांग्रेस सरकार के दौरान 2010 में राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित किया गया था और लोकसभा में भी इसके लिए सहमति थी। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पंचायत स्तर पर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत की थी, जिसके परिणामस्वरूप देश में बड़ी संख्या में महिलाएं पंचायत प्रतिनिधि बनीं।
भाजपा पर आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने महिला आरक्षण के मुद्दे को परिसीमन से जोड़कर इसे उलझा दिया है। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में महिला सशक्तिकरण के पक्ष में है तो 543 लोकसभा सीटों के आधार पर ही 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित घोषित की जानी चाहिए।



