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गन्ने के रस से चलेगी गाड़िया, कीमत होगी आधी

आखिर क्यों कहा नितिन गडकरी ने पेट्रोल और डीजल की गाड़ियों का अंतिम सफर। आइए जानते है कि कैसे गन्ने के रस से भविष्य में कैसे चला करेगी गाड़ियां ?

पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा जितनी कम होगी उतना पेट्रोल महंगा होगा। इसमें देखा जाए यदि जितना एथेनॉल ज्यादा मिलाया जाता है पेट्रोल में कीमत उसकी उतनी ही सस्ती हो जाती है।

हमारी पेट्रोल वाली गाड़ियों के इंजन इस तरह से बने हैं यदि उसमें पेट्रोल में एथेनॉल अधिक मिलाया जाए तो इंजन खराब होने की समस्या बन जाती है और इंजन खराब भी हो सकता है। ऐसे में एथेनॉल को पेट्रोल में सीमित मात्रा में ही मिलाया जाता है जिससे कि इंजन खराब ना हो इस वजह से पेट्रोल की कीमत में उछाल देखा जाता है।

नितिन गडकरी भविष्य में पूरी तरह से एथेनॉल के अनुरूप इंजन निर्माण कार्य पर जोर दे रहे है । ऐसे में इंजन भी एथेनॉल के मुताबिक बनेंगे जिससे कि इंजन में पेट्रोल की आवश्यकता ही ना पड़े और गाड़ी इथेनॉल से चलने लगेगी।

गौरतलब है कि गाड़ी इथेनॉल से चलेगी तो इसका रेट खुदबा खुद कम हो जाएगा। जहां अभी तक पेट्रोल 93 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है, वही एथेनॉल अनुमानित पेट्रोल से आधी कीमत पर मुहैया हो जाएगा। ऐसे में विकास की दिशा में स्वदेशी ईंधन विकासशील साबित होगा।

इथेनॉल कैसे तैयार किया जाता है ?

इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के शीरे, मक्का, गेहूं, चावल और सड़े हुए आलू जैसे स्टार्च व शुगर युक्त पदार्थों के फर्मेंटेशन से बनता है। यह एक नवीकरणीय जैव-ईंधन भींफूएल है, जिसे चावल व गन्ने के अलावा मक्का, ज्वार, जौ और अन्य बायोमास से भी तैयार किया जाता है।

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