उत्तराखंड बना पूर्ण साक्षर राज्य, राज्यपाल ने दी आधिकारिक मंजूरी

देहरादून: उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा प्राप्त कर लिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और केंद्र सरकार के यूएलएलएएस (ULLAS) नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने उत्तराखंड को आधिकारिक रूप से पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने की मंजूरी दे दी है।

98 प्रतिशत से अधिक पहुंची साक्षरता दर
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य की साक्षरता दर 98 प्रतिशत से अधिक हो गई है। भारत सरकार के उल्लास कार्यक्रम के तहत प्रदेश ने सभी निर्धारित मानकों को पूरा कर लिया है, जिसके बाद यह उपलब्धि हासिल हुई है।
वयस्क शिक्षा पर रहा विशेष फोकस
उल्लास कार्यक्रम के तहत प्रदेश में वयस्कों को बुनियादी साक्षरता, जीवन कौशल, व्यावसायिक प्रशिक्षण और सतत शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। इस अभियान में सामाजिक संस्थाओं, कॉरपोरेट इकाइयों और स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी रही। विशेष रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित वर्गों को साक्षर बनाने के लिए अभियान चलाया गया।
कम महिला साक्षरता वाले क्षेत्रों को मिली प्राथमिकता
सरकार ने उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी। गांवों को गोद लेकर निरक्षर वयस्कों तक शिक्षा पहुंचाई गई और उन्हें साक्षर बनाने का लक्ष्य पूरा किया गया।
देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बना उत्तराखंड
इस उपलब्धि के साथ उत्तराखंड देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। इससे पहले मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम यह दर्जा हासिल कर चुके हैं।
क्या होता है पूर्ण साक्षर राज्य?
केंद्र सरकार के उल्लास कार्यक्रम के अनुसार, जब किसी राज्य में 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की साक्षरता दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाती है और गैर-साक्षर आबादी तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाता है, तब उस राज्य को पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा दिया जाता है।



