उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित 17 मदरसे सील, 30 सितंबर तक आवेदन का मौका

देहरादून। मदरसा बोर्ड भंग होने के बाद भी बिना मान्यता संचालित हो रहे मदरसों के खिलाफ उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, समाज कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग की कार्रवाई जारी है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि मदरसा बंद होने के बाद भी संचालकों की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होगी। मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों के लिए समीप के अल्पसंख्यक विद्यालय में दाखिले की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए संबंधित प्रबंधकों को पत्र देना होगा।
राज्य सरकार के अनुसार प्रदेश में अब तक 452 मदरसों में से 17 को सील किया जा चुका है। इनमें ऊधमसिंह नगर के आठ, हरिद्वार के चार, नैनीताल के चार और देहरादून का एक मदरसा शामिल है। वहीं, तीन मदरसा प्रबंधकों ने स्वयं मदरसा बंद करने की लिखित सूचना दी है।
सरकार के अनुसार 200 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, जबकि 35 मदरसों को सरकार की ओर से मान्यता दी जा चुकी है। प्राधिकरण ने कहा है कि यदि कोई मदरसा 30 सितंबर 2026 तक मान्यता के लिए आवेदन करता है तो उसका आवेदन स्वीकार किया जाएगा।
अल्पसंख्यक मामलों के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में किसी भी शिक्षण संस्थान का संचालन निर्धारित नियमों और मान्यता के बिना नहीं होने दिया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ निर्धारित शैक्षणिक मानकों का अनुपालन कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन कर संचालित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी संस्था या समुदाय को परेशान करना नहीं है। उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।



