उत्तराखंड

हरिद्वार में मदरसों की मान्यता प्रक्रिया शुरू, अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से लेना होगा पंजीकरण

हरिद्वार: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी मदरसों को नियमित शिक्षा व्यवस्था के दायरे में लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी क्रम में हरिद्वार जिले में संचालित मदरसों को अब निजी विद्यालयों की तर्ज पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

26 मदरसों ने किया आवेदन

जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (बेसिक) अमित कुमार चंद ने बताया कि हरिद्वार जिले में करीब 250 मदरसे संचालित हैं। इनमें से अब तक 26 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन कर दिया है। अन्य मदरसों से भी लगातार आवेदन और आवश्यक दस्तावेज प्राप्त हो रहे हैं, जिनकी विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है।

मानकों पर खरा उतरने के बाद मिलेगी मान्यता

शिक्षा विभाग के अनुसार मदरसों को मान्यता के लिए निजी विद्यालयों की तरह निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। भवन, आधारभूत सुविधाएं, शिक्षण व्यवस्था, सुरक्षा मानक और आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद ही प्राधिकरण की ओर से मान्यता प्रदान की जाएगी। विभाग का उद्देश्य सभी मदरसों को एक समान और नियमानुसार संचालित शिक्षा व्यवस्था के अंतर्गत लाना है।

फिलहाल आवेदन की अंतिम तिथि तय नहीं

विभाग ने अभी आवेदन जमा करने की कोई अंतिम तिथि निर्धारित नहीं की है। इसके बावजूद अधिकारियों ने सभी मदरसा संचालकों से जल्द आवेदन करने की अपील की है, ताकि समय रहते सत्यापन और मान्यता की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

एक जुलाई से लागू हुआ नया प्राधिकरण

उत्तराखंड सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है, जिसे 1 जुलाई 2026 से लागू कर दिया गया। इसके साथ ही राज्य के मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया गया है। अब प्रदेश के सभी 452 मदरसों को प्राधिकरण से पंजीकरण और मान्यता लेना अनिवार्य होगा।

जांच में मिली थीं अनियमितताएं

हाल ही में सरकार के निर्देश पर हरिद्वार जिले के 131 मदरसों की जांच की गई थी। जांच के दौरान 23 मदरसों में अनियमितताएं सामने आईं, जबकि 11 मदरसों की पीएम पोषण योजना (मिड-डे मील) के तहत मिलने वाली धनराशि पर रोक लगा दी गई।

कई मदरसों के सामने जमीन की चुनौती

शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन मदरसों की है, जिनके पास अपनी भूमि नहीं है और जो मदरसा बोर्ड की संपत्ति पर संचालित हो रहे हैं। ऐसे संस्थानों को नए प्राधिकरण के निर्धारित मानकों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल वही मदरसे मान्यता प्राप्त करेंगे, जो शिक्षा विभाग द्वारा तय सभी मानकों का पालन करेंगे।

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