धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले महेंद्र भट्ट – “यह छात्र हित में लिया गया कठिन फैसला”

देहरादून : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह इस्तीफा किसी राजनीतिक दबाव का नतीजा नहीं, बल्कि छात्र हित और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए लिया गया कठिन निर्णय है।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हमेशा जनता की भावनाओं को सर्वोपरि रखती है। पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्र ने जिस तरह कदम उठाए, उससे साफ है कि सरकार युवाओं की चिंता को गंभीरता से लेती है।
भ्रम फैलाने का आरोप
महेंद्र भट्ट ने कहा कि भाजपा शुरू से कहती रही है कि इस आंदोलन के दौरान कई स्तरों पर छात्रों को गुमराह करने का प्रयास किया गया। वास्तविक तथ्यों के बजाय भ्रम फैलाकर मुद्दे को आगे बढ़ाया गया, जिससे बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हुए।
उन्होंने कहा कि जब किसी विषय को समाज के बीच सही तरीके से नहीं रखा जाता तो ऐसे दुष्परिणाम सामने आते हैं। सरकार की मंशा हमेशा छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा करना रही है, लेकिन कुछ लोगों ने इसे अलग दिशा देने की कोशिश की।
जनभावनाओं को दी प्राथमिकता
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने टकराव का रास्ता नहीं अपनाया। छात्रों की भावनाओं को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कदम उठाए। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी इसी भावना का प्रतीक है। सार्वजनिक जीवन में कई बार ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं जो व्यक्तिगत रूप से कठिन होते हैं, लेकिन व्यापक जनहित के लिए उन्हें स्वीकार करना पड़ता है।
छात्रों तक पहुंचा संवेदनशीलता का संदेश
महेंद्र भट्ट ने कहा कि इस आंदोलन से केवल सड़क पर उतरे छात्र ही नहीं, बल्कि घरों में बैठकर घटनाक्रम पर नजर रखने वाले लाखों छात्र भी प्रभावित हुए। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से यह संदेश गया है कि सरकार छात्रों की भावनाओं को समझती है और जरूरत पड़ने पर कठिन निर्णय लेने से पीछे नहीं हटती।
विपक्ष पर साधा निशाना
महेंद्र भट्ट ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों ने पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की। इससे छात्रों में असमंजस की स्थिति बनी। भाजपा का रुख शुरू से स्पष्ट रहा है कि छात्रों को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए।



