
रुद्रप्रयाग | केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह डोली भक्तों के जयकारों के बीच गौरीकुंड पहुंच चुकी है। स्थानीय श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर बाबा की डोली का भव्य स्वागत किया। डोली मंगलवार सुबह गौरीकुंड से केदारनाथ धाम के लिए प्रस्थान कर चुकी है। 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे विधि-विधान के साथ बाबा केदारनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।
फाटा से गौरीकुंड तक गूंजे जयकारे
सोमवार सुबह बाबा केदार की डोली फाटा से गौरीकुंड के लिए रवाना हुई। करीब 300 भक्त डोली के साथ मौजूद रहे। “बम-बम भोले” और “जय बाबा केदार” के जयघोष के साथ डोली गुप्तकाशी, फाटा, रामपुर, मैखंडा, सीतापुर और सोनप्रयाग होते हुए शाम करीब साढ़े तीन बजे गौरीकुंड पहुंची।
रास्ते भर स्कूली बच्चे, महिलाएं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु हाथों में फूल-मालाएं लेकर सड़क किनारे खड़े दिखाई दिए। गौरीकुंड पहुंचने पर डोली का भव्य स्वागत किया गया।
अप्रैल में कब-कब खुले कपाट
अप्रैल माह में पूर्व वर्षों में बाबा केदार के कपाट इन तिथियों को खुले:
18 अप्रैल 1974, 28 अप्रैल 1977, 30 अप्रैल 1980, 29 अप्रैल 1982, 29 अप्रैल 1985, 24 अप्रैल 1986, 27 अप्रैल 1992, 24 अप्रैल 1996, 21 अप्रैल 1999, 28 अप्रैल 2001, 25 अप्रैल 2004, 30 अप्रैल 2007, 30 अप्रैल 2009, 28 अप्रैल 2012, 24 अप्रैल 2015, 29 अप्रैल 2018, 25 अप्रैल 2023।
वर्ष 1974 में 18 अप्रैल को कपाट खुले थे, जो अब तक की सबसे शुरुआती तिथियों में से एक मानी जाती है। उस समय धाम में चारों ओर बर्फ थी और श्रद्धालुओं को संकरे रास्ते से होकर दर्शन करने पड़े थे।
अप्रैल में कपाट खुलना चुनौतीपूर्ण
अप्रैल माह भले ही मैदानी क्षेत्रों में गर्मी का संकेत देता हो, लेकिन हिमालयी क्षेत्रों में यह व्यवस्थाओं के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहता है। इस वर्ष भी कपाट खुलने से पहले धाम में भारी बर्फबारी हुई थी, जिससे तैयारियों में प्रशासन को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
हालांकि पिछले कुछ दिनों से मौसम साफ है और तेज धूप के कारण बर्फ तेजी से पिघल रही है। पैदल मार्ग से बर्फ हटाकर रास्ता सुगम बनाया गया है। धाम परिसर में भी अधिकांश बर्फ साफ कर दी गई है।
चारधाम में सबसे अधिक यात्री केदारनाथ में
उत्तराखंड के चारों धामों में सबसे अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचते हैं। कपाट खुलने के पहले ही दिन 20 हजार से अधिक यात्रियों के पहुंचने का अनुमान है।
बुजुर्गों के अनुसार, 70 के दशक में यात्रा संसाधनों और संपर्क सुविधाओं के अभाव में बेहद कठिन हुआ करती थी। गौरीकुंड पहुंचने के बाद ही धाम की स्थिति की जानकारी मिल पाती थी। आज संसाधनों और व्यवस्थाओं में काफी सुधार हुआ है, जिससे यात्रा अपेक्षाकृत सुगम हो गई है।
प्रशासन का कहना है कि यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं से मौसम और स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।



