ज्योलीकोट में दूषित पेयजल पर गाज – जल संस्थान और पेयजल निगम के 6 इंजीनियर निलंबित

सीएम धामी का सख्त एक्शन: जन स्वास्थ्य की अनदेखी पर नपे छह इंजीनियर, एक दिन पहले फर्जी प्रमाणपत्र मामले में भी हुई थी कड़ी कार्रवाई
देहरादून। उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के संकल्प को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कड़ा रुख जारी है। सोमवार को जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले अफसरों पर गाज गिरी है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर नैनीताल जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति और दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने पर उत्तराखण्ड जल संस्थान और पेयजल निगम के छह वरिष्ठ व कनिष्ठ इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रदेश में जन स्वास्थ्य से जुड़े मामले में पहली बार इतनी बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए भ्रष्टाचार और लापरवाही पर प्रहार तेज कर दिया है। इससे एक दिन पूर्व ही सीएम धामी ने NEET UG 2026 की राज्य केंद्रीयकृत काउंसिलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश लेने के मामले में सख्त कदम उठाया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले में शामिल आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र और उनकी प्रवेश प्रक्रिया निरस्त की जा चुकी है।
लापरवाही पर जांच के बाद तुरंत एक्शन
जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ की शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री ने शीर्ष अधिकारियों को मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जिला प्रशासन नैनीताल की जांच रिपोर्ट के आधार पर जल संस्थान हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता, नैनीताल जल संस्थान के सहायक अभियंता व अपर सहायक अभियंता, तथा पेयजल निगम भीमताल के अधिशासी अभियंता, प्रभारी सहायक अभियंता व कनिष्ठ अभियंता को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को भविष्य के लिए चेतावनी दी गई है।
क्या बोले सीएम
जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हमारी सरकार के लिए जनहित सर्वोपरि है और जो भी अधिकारी या कर्मचारी जनता के हितों की अनदेखी करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सभी विभागाध्यक्षों और शीर्ष अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।”



