देहरादून मास्टर प्लान 2041 पर सुनवाई का शेड्यूल जारी, 6 से 21 जुलाई तक दर्ज करा सकेंगे आपत्तियां और सुझाव

देहरादून: देहरादून महायोजना (मास्टर प्लान) 2041 को लेकर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने सुनवाई का कार्यक्रम जारी कर दिया है। 6 जुलाई से 21 जुलाई 2026 तक विभिन्न सेक्टरों में सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी, जहां नागरिक, भू-स्वामी, संस्थाएं और विशेषज्ञ अपनी आपत्तियां एवं सुझाव प्रस्तुत कर सकेंगे।
एमडीडीए के अनुसार सुनवाई के दौरान प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का परीक्षण किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर मास्टर प्लान में संशोधन भी किया जा सकता है। प्राधिकरण का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई जाएगी और प्रत्येक स्थल पर अधिकारियों की टीम मौजूद रहेगी।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 शहर के दीर्घकालिक विकास का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें आवासीय, व्यावसायिक, संस्थागत, औद्योगिक, हरित क्षेत्र, परिवहन व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं के विकास से जुड़े विभिन्न प्रावधान शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि नागरिकों और विभिन्न संस्थाओं से प्राप्त सुझावों को गंभीरता से लिया जाएगा तथा नियमानुसार उनका परीक्षण किया जाएगा।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि सुनवाई के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रत्येक दिन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक लोग अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। पूर्व में आपत्ति दर्ज करा चुके लोग भी दोबारा अपना पक्ष रख सकते हैं।
मास्टर प्लान 2041 सुनवाई का कार्यक्रम
06 जुलाई: प्राइमरी स्कूल, अजबपुर खुर्द (सेक्टर-1)
07 जुलाई: ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, क्लेमनटाउन (सेक्टर-2)
08 जुलाई: दून यूनिवर्सिटी परिसर (सेक्टर-3)
09 जुलाई: नगर निगम टाउन हॉल (सेक्टर-4)
10 जुलाई: महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज, रायपुर (सेक्टर-5)
13 जुलाई: आईटीआई पार्क, देहरादून (सेक्टर-6)
14 जुलाई: जीआरडी यूनिवर्सिटी, राजपुर रोड (सेक्टर-7)
15 जुलाई: सीएनआई गर्ल्स इंटर कॉलेज, राजपुर रोड (सेक्टर-8)
17 जुलाई: पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी, बिधौली (सेक्टर-9)
18 जुलाई: तहसील देहरादून का मिनी टाउन हॉल (सेक्टर-10)
20 जुलाई: पॉलीटेक्निक भवन, सुद्धोवाला (सेक्टर-11)
21 जुलाई: वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट, चंद्रबनी रोड (सेक्टर-12)
एमडीडीए का कहना है कि मास्टर प्लान 2041 के जरिए देहरादून के सुनियोजित विकास की रूपरेखा तय की जाएगी, इसलिए नागरिकों की भागीदारी इस प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण होगी।



