उत्तराखंड

भगवानपुर की फैक्ट्री में वन विभाग की छापेमारी, 14,900 किलो तारपीन तेल और 17,252 किलो बिरोजा बरामद

रुड़की: हरिद्वार जिले के भगवानपुर क्षेत्र में वन विभाग देहरादून की टीम ने एक फैक्ट्री पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में तारपीन का तेल और बिरोजा बरामद किया है। दोनों उत्पादों का मौके पर संतोषजनक लेखा-जोखा नहीं मिलने पर वन विभाग ने तैयार माल को सील कर दिया। अब विभाग फैक्ट्री में कच्चे माल की आपूर्ति और उत्पादन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेगा।

 

जानकारी के अनुसार, वन विभाग की टीम ने रुड़की रेंज के भगवानपुर कस्बा क्षेत्र के रुहालकी दयालपुर गांव स्थित फैक्ट्री में कार्रवाई की। बताया गया कि यहां चीड़ की लकड़ी से निकलने वाले लीसे से तारपीन का तेल और बिरोजा तैयार किया जा रहा था।

 

मौके पर नहीं मिला मैनेजर और कंपनी स्वामी

 

छापेमारी के दौरान फैक्ट्री में मैनेजर और कंपनी स्वामी मौजूद नहीं थे। टीम को मौके पर चार कर्मचारी मिले। वन विभाग के अधिकारियों ने फैक्ट्री में मौजूद तैयार माल और उत्पादन से संबंधित दस्तावेज मांगे, लेकिन कर्मचारी संतोषजनक लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं करा सके।

 

इसके बाद टीम ने फैक्ट्री में मौजूद तैयार उत्पाद को सील कर दिया।

 

हजारों किलो तैयार माल बरामद

 

उप प्रभागीय वन अधिकारी उदय गौड़ के मुताबिक, फैक्ट्री से करीब 14,900 किलोग्राम तैयार तारपीन का तेल और 17,252 किलोग्राम बिरोजा बरामद हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, मौके पर बरामद माल से संबंधित संतोषजनक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।

 

अब वन विभाग यह जांच करेगा कि फैक्ट्री में चीड़ की लकड़ी किस डिपो से लाई जा रही थी, कितनी मात्रा में लकड़ी फैक्ट्री तक पहुंची और उससे कितना उत्पादन किया गया।

 

जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई

 

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि निर्धारित मात्रा से अधिक या किसी तरह का अनियमित स्टॉक पाया जाता है तो कंपनी स्वामी और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

 

छापेमारी के बाद फैक्ट्री के संचालन और रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विभाग अब यह भी जांच करेगा कि फैक्ट्री कब से संचालित हो रही थी, उसके पास आवश्यक लाइसेंस और अनुमति है या नहीं तथा उत्पादन और स्टॉक का पूरा हिसाब-किताब क्यों उपलब्ध नहीं था।

 

फिलहाल वन विभाग ने तैयार माल को सील कर दिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

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