मदरसों में 12,289 फर्जी नामांकन मिलने के बाद बड़ा एक्शन, पांच जिलों के स्कूलों में मिड डे मील जांच के आदेश

हरिद्वार: हरिद्वार जिले के मदरसों में हजारों फर्जी नामांकन सामने आने के बाद उत्तराखंड सरकार ने अब सरकारी स्कूलों और मदरसों में मिड डे मील योजना की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षा महानिदेशालय और संबंधित मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) को छात्र संख्या और मिड डे मील वितरण की जांच के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, हाल ही में हरिद्वार जिले के मदरसों में जिला प्रशासन द्वारा की गई जांच में 12,289 बच्चों का नामांकन फर्जी पाया गया था। जांच में सामने आया कि मार्च 2026 में मदरसों के अभिलेखों में 31,780 छात्रों का नामांकन दर्ज था, जबकि अप्रैल 2026 में सत्यापन के बाद यह संख्या घटकर 19,491 रह गई।
पांच जिलों में होगी विशेष जांच
शिक्षा विभाग अब हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून के मैदानी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों के साथ-साथ पौड़ी जिले के कोटद्वार तथा नैनीताल जिले के हल्द्वानी और रामनगर क्षेत्र में भी जांच कराएगा। जांच के दौरान स्कूलों और मदरसों में दर्ज छात्र संख्या तथा मिड डे मील के लिए तैयार किए जा रहे भोजन का मिलान किया जाएगा।
इस अभियान में शिक्षा महानिदेशालय, पीएम पोषण योजना कार्यालय और संबंधित जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारी शामिल रहेंगे।
गड़बड़ी मिलने पर होगी धनराशि की वसूली
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अनुसार हरिद्वार के कुछ मदरसों में वास्तविक छात्र संख्या और मिड डे मील रिकॉर्ड में भारी अंतर पाया गया है। ऐसे मामलों में संबंधित संस्थानों से सरकारी धनराशि की वसूली की जाएगी। साथ ही अन्य जिलों के मदरसों की भी जांच जारी है।
लाखों छात्रों को मिल रहा योजना का लाभ
प्रदेश में प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत सरकारी और अशासकीय विद्यालयों के साथ-साथ मदरसों में कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है। वर्ष 2025-26 में योजना के तहत प्राथमिक स्तर पर 3,15,579 और उच्च प्राथमिक स्तर पर 2,41,620 छात्र-छात्राओं को लाभ मिला।
शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल सती ने बताया कि जांच के दौरान स्कूलों और मदरसों में दर्ज वास्तविक छात्र संख्या, उपस्थिति और मिड डे मील वितरण की स्थिति का सत्यापन किया जाएगा, ताकि योजना का लाभ सही पात्र छात्रों तक पहुंच सके।
पारदर्शिता पर सरकार का जोर
शिक्षा विभाग का मानना है कि जांच से योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर रोक लगेगी। यदि कहीं भी फर्जी नामांकन या मिड डे मील में अनियमितता पाई गई तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



