लेखक गाँव में चौथे दिन ओडिशी और फ्यूज़न प्रस्तुतियों ने बिखेरा भारतीय संस्कृति का रंग, कलाकारों का हुआ सम्मान

देहरादून। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय और लेखक गाँव, थानों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय “विरासत कला उत्सव” का चौथा दिन शास्त्रीय नृत्य की भव्य और मनमोहक प्रस्तुतियों के नाम रहा। इस सांस्कृतिक संध्या में कला, संस्कृति और आध्यात्मिकता का ऐसा समागम देखने को मिला, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. सविता मोहन (पूर्व सचिव, भाषा संस्थान एवं पूर्व निदेशक उच्च शिक्षा उत्तराखंड), प्रो. गोविंद सिंह रजवार (पूर्व प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय नरेंद्र नगर) तथा केंद्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) मुकेश उपाध्याय द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही कार्यक्रम का औपचारिक आरंभ हुआ और पूरे वातावरण में सांस्कृतिक गरिमा का भाव छा गया।

“शिव मंगलाचरण” से हुआ शुभारंभ

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत “शिव मंगलाचरण – गंगा तरंग” से की गई, जो ओडिशी नृत्य की पारंपरिक मंगलाचरण रचना है। इस प्रस्तुति में नृत्यांगना ने भगवान शिव, अपने गुरु, धरती माता और दर्शकों को नमन करते हुए आशीर्वाद की कामना की। गंगा के पावन प्रवाह और उसकी दिव्यता को अत्यंत भावपूर्ण और सजीव शैली में प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।
ओडिशी नृत्य ने बांधा समां
इसके पश्चात रमिंदर खुराना ने ओडिशी नृत्य की उत्कृष्ट प्रस्तुति दी। उनकी भाव-भंगिमाएं, लय और ताल का संतुलन तथा नृत्य की पारंपरिक शैली ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा और सौंदर्य स्पष्ट रूप से झलकता नजर आया।
फ्यूज़न प्रस्तुति बनी आकर्षण का केंद्र
डॉ. कविता खुराना के निर्देशन में उनके दल ने “वंदे मातरम्” पर आधारित एक विशेष फ्यूज़न नृत्य प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों और समकालीन नृत्य का सुंदर समन्वय देखने को मिला। विभिन्न नृत्य शैलियों की तकनीक, गति, अभिव्यक्ति और तालमेल ने कार्यक्रम में एक नया रंग भर दिया। यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही और इसे खूब सराहना मिली।
कलाकारों और अतिथियों का सम्मान
कार्यक्रम के समापन पर उपनिदेशक (कार्यक्रम) मुकेश उपाध्याय ने सभी मुख्य अतिथियों और कलाकारों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान कलाकारों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की गई और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम का सफल संचालन शिवम ढौंढियाल ने किया, जिन्होंने पूरे आयोजन को सुचारु रूप से आगे बढ़ाया।
गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. प्रदीप भारद्वाज, प्रति कुलपति प्रो. राकेश सुंदरियाल, सचिव बालकृष्ण चमोली, संयुक्त निदेशक डॉ. प्रदीप कोठियाल, चमन लाल महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सुशील उपाध्याय, साहित्यकार डॉ. बेचैन कंडियाल, अनिल शर्मा, डॉ. भारती मिश्रा, रीता चमोली, हरेंद्र नेगी ‘तेजांश’, प्रो. आरती गौड़, डॉ. रविकांत शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
संस्कृति के संरक्षण का सशक्त मंच
“विरासत कला उत्सव” न केवल कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान कर रहा है, बल्कि यह भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन का एक महत्वपूर्ण मंच भी बन रहा है। इस तरह के आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है और पारंपरिक कलाओं को नई पहचान मिलती है।



