मानसून में गर्भवती महिलाओं के लिए हेल्थ विभाग का विशेष प्लान, जरूरत पड़ने पर होगी एयरलिफ्ट

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून के दौरान गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष तैयारी की है। खासकर पर्वतीय और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाली हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को प्रसव से 10 से 15 दिन पहले ही अस्पतालों के नजदीक शिफ्ट किया जाएगा। वहीं, आपात स्थिति में गर्भवती महिलाओं को हेलीकॉप्टर के जरिए एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई है।
प्रदेश में हर वर्ष मानसून के दौरान भारी बारिश और भूस्खलन के कारण कई सड़क मार्ग बाधित हो जाते हैं। ऐसे में दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने में कठिनाई होती है, जिससे जच्चा-बच्चा दोनों की जान जोखिम में पड़ सकती है। इसी चुनौती को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इस बार पहले से ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार कर ली है। विशेष रूप से हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें समय रहते अस्पताल या बर्थ वेटिंग होम में भर्ती कराया जा सके। विभाग का लक्ष्य सभी महिलाओं का सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करना है।
योजना के तहत दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को संभावित प्रसव तिथि से लगभग 10 दिन पहले बर्थ वेटिंग होम में शिफ्ट किया जाएगा। इसके अलावा आशा कार्यकर्ता और एएनएम नियमित रूप से इन महिलाओं के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही हैं और समय-समय पर आवश्यक सलाह भी दे रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के दौरान नैनीताल जिले में 2,487, टिहरी में 1,796, चमोली में 892 और रुद्रप्रयाग में 862 महिलाओं के प्रसव होने की संभावना है। अन्य जिलों से भी माहवार प्रसव संबंधी आंकड़े जुटाए जा रहे हैं, ताकि उसी के अनुरूप स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा सकें।
स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. शिखा जगपांगी ने बताया कि मानसून के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष मॉनिटरिंग सेल बनाया गया है। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और नजदीकी डिलीवरी डेट वाली महिलाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। अक्टूबर तक की संभावित डिलीवरी की सूची तैयार कर ली गई है और जरूरत पड़ने पर महिलाओं को समय से पहले अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ता और एएनएम महिलाओं को नियमित परामर्श दे रही हैं। साथ ही टेली-कंसल्टेशन के माध्यम से भी चिकित्सकीय सलाह उपलब्ध कराई जा रही है। सभी जिलों में गर्भवती महिलाओं के लिए वेटिंग रूम बनाए गए हैं। यदि आवश्यकता पड़ी तो होटल या अन्य भवन किराए पर लेकर भी महिलाओं को सुरक्षित ठहराया जाएगा, ताकि प्रसव के समय उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा सके।



