उत्तराखंड

उत्तराखंड में मानसून आपदाओं से निपटने की तैयारी, 2 जुलाई को 13 जिलों के 66 स्थानों पर होगी राज्यस्तरीय मॉक ड्रिल

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की दस्तक के साथ ही राज्य सरकार ने संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। बादल फटना, भूस्खलन, बाढ़ और अतिवृष्टि जैसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए 2 जुलाई को राज्य के सभी 13 जिलों के 66 स्थानों पर राज्यस्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मॉक ड्रिल का निरीक्षण करेंगे।

 

मॉक ड्रिल से पहले हुई टेबल टॉप एक्सरसाइज

 

मॉक ड्रिल की तैयारियों के तहत सोमवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC), देहरादून में टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई। इसमें विभिन्न विभागों और जिला प्रशासन ने बाढ़, क्लाउडबर्स्ट, अतिवृष्टि, नदी-नालों के उफान और भूस्खलन जैसी संभावित आपदाओं से निपटने की रणनीति, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की समीक्षा की।

 

राहत और बचाव संसाधनों की हुई समीक्षा

 

अभ्यास के दौरान विभिन्न विभागों की तैयारियों का आकलन किया गया। इसमें जेसीबी, नाव, राफ्ट, गोताखोर, जल पुलिस और अन्य राहत एवं बचाव उपकरणों के उपयोग के साथ राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

 

जिलों को दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देश

 

यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) डीआईजी राजकुमार नेगी ने सभी जिलों को मॉक ड्रिल की तैयारियों और संचालन संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वहीं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यह अभ्यास विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और आपदा के समय त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

 

आपदा प्रबंधन में पूर्व तैयारी पर जोर

 

सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल अभ्यास करना नहीं, बल्कि वास्तविक आपदा की स्थिति में विभागों की तत्परता, संसाधनों की उपलब्धता और त्वरित निर्णय क्षमता को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास के माध्यम से संभावित कमियों और चुनौतियों की पहचान कर समय रहते उनका समाधान किया जाएगा, ताकि वास्तविक आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी और समन्वित तरीके से संचालित किए जा सकें।

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