NEET UG फर्जी सर्टिफिकेट मामले में बढ़ा जांच का दायरा, 12 संदिग्ध एसआईटी के रडार पर

देहरादून: NEET UG MBBS फर्जी सर्टिफिकेट मामले में एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले का नेटवर्क भी सामने आ रहा है। एसआईटी दो आरोपियों मास्टरमाइंड रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब जांच में दो निलंबित लेखपालों की भूमिका और उनके पुराने रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।
जांच में सामने आया है कि मास्टरमाइंड रूपेश पंडित ने प्रति अभ्यर्थी 45 लाख रुपये में एमबीबीएस की सीट दिलाने का सौदा किया था। पुलिस के अनुसार गिरोह में अलग-अलग सदस्यों की जिम्मेदारी तय थी। एक टीम एमबीबीएस में दाखिले के इच्छुक अभ्यर्थियों की तलाश करती थी, जबकि दूसरी टीम सामाजिक या आरक्षित श्रेणी के अनुरूप दस्तावेज और फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने की व्यवस्था करती थी। कुछ सदस्य दाखिले की पूरी प्रक्रिया संभालते थे।
एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम से चार फर्जी प्रमाण पत्र
स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र से जुड़े दो अलग-अलग मुकदमों की जांच में अब तक चार अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इन अभ्यर्थियों के लिए धर्मवीर वर्मा के नाम से फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार किए गए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रमाण पत्र तैयार करने, आवेदन लगाने और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
पुलिस के अनुसार गिरोह ऐसे अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से संपर्क करता था, जिन्हें नीट में अपेक्षित परिणाम नहीं मिला या मनचाहे मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पाया। इसके बाद उन्हें निर्धारित प्रक्रिया से अलग आसान तरीके से एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने का भरोसा दिया जाता था।
45 लाख रुपये में तय हुई थी एक सीट की डील
आरोप है कि रूपेश पंडित ने उत्तराखंड में तीन छात्राओं को स्वतंत्रता सेनानी कोटे से सरकारी एमबीबीएस सीट दिलाने के नाम पर उनके परिजनों से 60 लाख रुपये एडवांस लिए थे। प्रत्येक छात्रा के दाखिले के लिए 45 लाख रुपये तय किए गए थे और 20-20 लाख रुपये एडवांस लिए गए थे। बाकी रकम दाखिला प्रक्रिया पूरी होने के बाद दी जानी थी।
पुलिस के अनुसार रूपेश पंडित बिहार का रहने वाला है और मेरठ की द्वारिकापुरी कॉलोनी में पिछले पांच साल से मिकोडो पाठशाला नाम की कंसल्टेंसी चला रहा था। आरोप है कि कंसल्टेंसी की आड़ में वह देश के निजी विश्वविद्यालयों के साथ विदेशों में भी एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए और बीकॉम जैसे पेशेवर पाठ्यक्रमों में कमीशन पर दाखिला दिलाने का काम कर रहा था।
फर्जी प्रमाण पत्र से कम अंकों पर दाखिला
जांच में तीन छात्राओं के दाखिले रद्द किए जा चुके हैं। इनमें एक छात्रा के 301 अंक होने पर श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में, दूसरी के 338 अंक होने पर हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में और तीसरी के 400 अंक होने पर हरिद्वार मेडिकल कॉलेज में सीट रद्द हुई। एक अन्य छात्रा के 234 अंक थे और उसे सीट आवंटित नहीं हुई, जबकि उसका प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया।
प्रदेश में एमबीबीएस दाखिले के लिए स्वतंत्रता सेनानी कोटे की कुल 18 सीटें हैं। इनमें 11 सरकारी और सात निजी सीट शामिल हैं।
दो लेखपाल निलंबित, पुराने मामलों की भी जांच
पूरा मामला जिलाधिकारी के सामने आने के बाद जांच में दो लेखपालों को निलंबित किया गया है। अब फर्जी दस्तावेज तैयार कराने के मामले की जांच राजस्व विभाग तक पहुंच रही है, जहां से प्रमाण पत्रों की सत्यापन प्रक्रिया शुरू होती है।
जांच के घेरे में आए दोनों लेखपालों की पुरानी शिकायतों की फाइल भी सामने आई है। बताया गया है कि दोनों के खिलाफ पहले मुख्यमंत्री पोर्टल और जिलाधिकारी कार्यालय तक शिकायतें पहुंच चुकी थीं। आरोप है कि एक लेखपाल ने आरोपी के घर का निरीक्षण किए बिना करीब एक घंटे में दस्तावेज तैयार कर दिए, जबकि दूसरे ने 13 दिन में दस्तावेज तैयार किए और उसने भी घर का निरीक्षण नहीं किया।
आरोपियों के मोबाइल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे
दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनके मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। पुलिस को उम्मीद है कि कॉल डिटेल, चैट, दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से गिरोह में शामिल दूसरे लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। पुलिस अभ्यर्थियों, बिचौलियों और अन्य संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है।
एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के अनुसार एसआईटी की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अब तक 12 संदिग्ध रडार पर हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इनकी गिरफ्तारी की जा सकती है।



