
हरिद्वार। पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में संतों के साथ मंच साझा करते हुए मदरसा शिक्षा को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को भंग किया जाएगा और प्रदेश में संचालित सभी मदरसों में जुलाई से उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।
सीएम ने स्पष्ट किया कि जिन मदरसों में शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाया जाएगा, उन्हें बंद कर दिया जाएगा।
संत सम्मेलन में दिया बयान
उत्तरी हरिद्वार स्थित अखंड परमधाम आश्रम में स्वामी परमानंद गिरी के 71वें संन्यास जयंती महोत्सव के दौरान मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की।
उन्होंने कहा कि गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है। राज्य सरकार ने पिछले अनुभवों के आधार पर यात्रा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की तैयारी की है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
महिला आरक्षण पर विपक्ष पर हमला
महिला आरक्षण बिल को लेकर मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने लंबे समय तक देश में शासन किया, उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए ठोस कदम नहीं उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का विरोध कर विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों पर कुठाराघात किया है।
संतों ने किया फैसले का स्वागत
संत सम्मेलन में मंच से मदरसा बोर्ड को भंग करने के बयान के बाद साधु-संतों ने सरकार के निर्णय का स्वागत किया। स्वामी कैलाशानंद गिरि ने कहा कि देवभूमि में वैध या अवैध किसी भी प्रकार के मदरसों की आवश्यकता नहीं है। वहीं स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि शिक्षा नीति के तहत सभी को समान शिक्षा अधिकार मिलना चाहिए।
आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में प्रयास
मुख्यमंत्री ने स्वामी परमानंद गिरि के जीवन को तप, त्याग और साधना का आदर्श बताते हुए कहा कि उनके विचार समाज को सेवा और मानव कल्याण की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिल रही है और उत्तराखंड को आध्यात्मिक राजधानी बनाने के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है।



