
हरिद्वार: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध चंडी देवी मंदिर के मुख्य पुजारी के खिलाफ लगे आपराधिक आरोपों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने कहा कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ बढ़ती शिकायतें बेहद चिंताजनक हैं और इससे आस्था केंद्रों की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि यदि धार्मिक स्थलों से जुड़े पदाधिकारी लिव-इन संबंध, घरेलू विवाद या छेड़छाड़ जैसे आरोपों में घिर रहे हैं, तो यह स्थिति अत्यंत गंभीर है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे जैसे पवित्र स्थानों को ऐसे विवादों से मुक्त रहना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला हरिद्वार के चंडी देवी मंदिर के महंत की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2021 में महंत ने अपनी पत्नी को एक महिला से मिलवाया था। बाद में दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने का आरोप लगाया गया है।
पत्नी का दावा है कि उन्हें महंत की लिखावट वाली एक डायरी मिली, जिसमें संबंधित महिला के नाम करीब साढ़े पांच लाख रुपये की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) का उल्लेख था। आरोप है कि पूछताछ के दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध होने और उस संबंध से एक बेटी के जन्म की बात सामने आई।
प्रतिष्ठा और पारदर्शिता पर सवाल
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े पदाधिकारियों के आचरण पर समाज की विशेष नजर रहती है। ऐसे मामलों से न केवल व्यक्तिगत छवि बल्कि धार्मिक संस्थाओं की साख भी प्रभावित होती है।
मामले की अगली सुनवाई नियत तिथि पर होगी।



