उत्तराखंड

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का बड़ा फैसला: बाहरी राज्यों के नए छात्रों को मदरसों में नहीं मिलेगा प्रवेश

देहरादून। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने प्रदेश में संचालित मदरसों को लेकर अहम निर्णय लिया है। बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने घोषणा की है कि वक्फ बोर्ड के अधीन चल रहे 117 मदरसों में अब दूसरे राज्यों से आने वाले नए छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

बोर्ड का कहना है कि उसका प्राथमिक उद्देश्य उत्तराखंड के बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। बाहरी राज्यों से आने वाले छात्रों की पृष्ठभूमि और दस्तावेजों की गहन जांच करना सीमित संसाधनों के चलते चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में फिलहाल स्थानीय विद्यार्थियों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। यह बयान सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

धामी सरकार की नई नियमावली को मंजूरी

पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था के तहत राज्य में संचालित मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता और नवीनीकरण के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।

यह नियमावली उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक-2025 के तहत तैयार की गई है। इसमें मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों के संस्थानों के आवेदन, मान्यता और निरीक्षण से जुड़े स्पष्ट नियम तय किए गए हैं।

ऑनलाइन आवेदन और तीन साल की मान्यता

नई व्यवस्था के अनुसार, संस्थानों को निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज और निर्धारित शुल्क जमा करना अनिवार्य रहेगा।

मान्यता मिलने के बाद उसकी वैधता तीन शैक्षणिक वर्षों तक होगी। नवीनीकरण के लिए संस्थानों को अवधि समाप्त होने से कम से कम तीन महीने पहले आवेदन करना होगा।

जमीन, फंड और स्टाफ की होगी जांच

मान्यता देने से पहले संस्थान की भूमि, आर्थिक स्थिति, स्टाफ की शैक्षणिक योग्यता और अल्पसंख्यक हितों से जुड़े पहलुओं की विस्तृत जांच की जाएगी। इसके लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र, प्रबंधन समिति का विवरण, बैंक रिकॉर्ड और शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

संस्थानों को सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और अपने अल्पसंख्यक स्वरूप से संबंधित घोषणा भी देनी होगी।

नियम उल्लंघन पर कार्रवाई

उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को संस्थानों का निरीक्षण करने और नियमों के पालन की समीक्षा का अधिकार दिया गया है। यदि किसी संस्थान में नियमों के उल्लंघन या फंड के दुरुपयोग की शिकायत मिलती है, तो सुनवाई के बाद उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है।

राज्य सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।

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