उत्तराखंड

उत्तराखंड में बदला मतदाता गणित, 2022 के मुकाबले 11 लाख से ज्यादा का अंतर; 2027 चुनाव से पहले नई तस्वीर

देहरादून। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी होने के साथ 2027 विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के मतदाता गणित की नई तस्वीर सामने आई है। अंतिम सूची में कुल 71 लाख 58 हजार 949 मतदाता दर्ज हैं। 2022 विधानसभा चुनाव के समय जारी अंतिम मतदाता सूची में 82 लाख 66 हजार 644 मतदाता थे। दोनों सूचियों के बीच 11 लाख 7 हजार 695 मतदाताओं का अंतर है। हालांकि, इस अंतर को सीधे SIR के दौरान हटाए गए नामों के रूप में नहीं देखा जा सकता।

SIR की प्रक्रिया 8 जून 2026 को शुरू हुई थी। उस समय प्रदेश में 79 लाख 60 हजार 762 मतदाता दर्ज थे। 14 जुलाई को जारी ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर 71 लाख 33 हजार 785 रह गई थी। दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 3 अक्टूबर को अंतिम सूची जारी की गई, जिसमें 71 लाख 58 हजार 949 मतदाता शामिल हैं। अंतिम सूची में 1 लाख 29 हजार 872 नए मतदाता भी जोड़े गए।

विधानसभावार आंकड़ों के अनुसार, 70 में से 69 विधानसभा क्षेत्रों में 2022 के मुकाबले मतदाताओं की संख्या कम हुई है। हरिद्वार की ज्वालापुर विधानसभा सीट एकमात्र ऐसी सीट है, जहां 2022 की तुलना में 73 मतदाता बढ़े हैं।

देहरादून जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 57 हजार 318 मतदाताओं का अंतर सामने आया है। इसके अलावा कैंट में 46 हजार 346, ऋषिकेश में 43 हजार 299, रायपुर में 39 हजार 989, राजपुर रोड में 39 हजार 46 और मसूरी में 34 हजार 113 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। वहीं सहसपुर में 12 हजार 608, डोईवाला में 20 हजार 240, विकासनगर में 7 हजार 714 और चकराता में 2 हजार 66 मतदाताओं का अंतर है।

देहरादून के अलावा मैदानी क्षेत्रों की कई विधानसभा सीटों पर भी बड़ी कमी सामने आई है। काशीपुर में 41 हजार 281, हरिद्वार में 39 हजार 553, रानीपुर में 32 हजार 129, रुड़की में 31 हजार 989, हल्द्वानी में 31 हजार 294 और बाजपुर में 23 हजार 17 मतदाताओं का अंतर दर्ज किया गया है।

ऊधमसिंह नगर जिले में भी मतदाता संख्या में कमी देखने को मिली है। किच्छा में 21 हजार 236, रुद्रपुर में 19 हजार 552, जसपुर में 17 हजार 566, खटीमा में 12 हजार 919, नानकमत्ता में 12 हजार 857, गदरपुर में 8 हजार 848 और सितारगंज में 5 हजार 200 मतदाताओं का अंतर सामने आया है।

पहाड़ी विधानसभा क्षेत्रों में भी मतदाता संख्या घटी है। टिहरी में 18 हजार 329, लैंसडाउन में 19 हजार 937, चौबट्टाखाल में 16 हजार 933, पौड़ी में 16 हजार 118, श्रीनगर में 14 हजार 367, सल्ट में 14 हजार 396, द्वाराहाट में 14 हजार 16, नरेंद्रनगर में 12 हजार 998 और बदरीनाथ में 13 हजार 240 मतदाताओं का अंतर दर्ज किया गया है।

उत्तरकाशी जिले की गंगोत्री विधानसभा सीट पर 11 हजार 320, यमुनोत्री में 2 हजार 583 और पुरोला में 983 मतदाताओं की कमी बताई गई है। चमोली की थराली सीट पर 8 हजार 394 और कर्णप्रयाग में 11 हजार 643 मतदाताओं का अंतर सामने आया है। रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट में भी 9 हजार 337 मतदाताओं की कमी दर्ज हुई है।

मतदाता सूची में हुए इस बदलाव को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर धर्मपुर, कैंट, ऋषिकेश, रायपुर, राजपुर रोड, काशीपुर, हरिद्वार और रुड़की जैसी सीटों पर मतदाता संख्या में बड़ा अंतर आया है। ऐसे में राजनीतिक दलों को अपने बूथ स्तर के पुराने आंकड़ों और मौजूदा मतदाता सूची का नए सिरे से मिलान करना होगा।

हालांकि, केवल मतदाताओं की संख्या में कमी के आधार पर किसी राजनीतिक दल को सीधे फायदा या नुकसान होने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमरेंद्र बिष्ट ने SIR प्रक्रिया को लेकर भाजपा और निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने निर्वाचन आयोग की मदद से चुनाव में गड़बड़ी की कोशिश की है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार बनाएगी।

वहीं, भाजपा मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किए गए बदलाव निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए जरूरी थे। उनके अनुसार, मृत, स्थानांतरित और फर्जी या दोहरे नामों को हटाने की प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को अपडेट किया गया है।

SIR के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के चुनावी डेटा की तस्वीर जरूर बदल दी है। अब राजनीतिक दल इसी नई मतदाता सूची के आधार पर बूथ स्तर पर अपनी रणनीति और चुनावी तैयारियों को नए सिरे से तय करेंगे।

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