आपदा

तिब्बत से आई बाढ़ ने नेपाल में मचाई तबाही, 105 भारतीय लापता; कई इलाकों में हाई अलर्ट

काठमांडू: उत्तरी नेपाल में तिब्बत की ओर से आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से सीमावर्ती इलाकों में कई बस्तियां प्रभावित हुई हैं। करीब 400 लोगों के लापता होने की सूचना है, जिनमें कम से कम 105 भारतीय शामिल बताए जा रहे हैं। कई लोगों की मौत की भी खबर है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार रसुवा में बाढ़ के बाद कुल 384 यात्री लापता हैं। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशी यात्रियों में 105 भारतीय पर्यटक और 37 एनआरआई बताए गए हैं। भारत के तमिलनाडु के 37 लोग भी लापता लोगों में शामिल हैं।

बाढ़ के कारण रसुवा के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। कई वाहन, सामान और संपत्तियां पानी में बह गईं। हाल ही में बना एक पुल भी बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो गया। इसके अलावा करीब एक दर्जन पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा जिलों में नदी किनारे रहने वाले लोगों को हाई अलर्ट पर रहने और सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक बाढ़ का स्तर असामान्य रूप से काफी ज्यादा था और नुकसान का विस्तृत आकलन अभी जारी है।

नेपाल में बाढ़ की स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की और जान-माल के नुकसान पर संवेदना जताई। पीएम मोदी ने मुश्किल की इस घड़ी में नेपाल के साथ भारत की एकजुटता जताते हुए हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया। उन्होंने बताया कि बचाव और राहत कार्यों के लिए दोनों देशों की टीमें मिलकर काम कर रही हैं।

बचाव अभियान के लिए नेपाल सेना, आर्म्ड पुलिस फोर्स और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है। सेना ने खोज और बचाव के लिए त्रिशूली नदी के आसपास दो हेलीकॉप्टर भेजे हैं। इमरजेंसी मेडिकल रेस्क्यू टीम से लैस एक हेलीकॉप्टर को त्रिशूली जिला अस्पताल की ओर भी रवाना किया गया है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने प्रभावित लोगों और पर्यटकों की सहायता के लिए इमरजेंसी नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और टूरिस्ट पुलिस नंबर 9851289445 जारी किया है।

अधिकारियों के मुताबिक बुधवार सुबह करीब नौ बजे भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ा। भोटे कोशी आगे चलकर त्रिशूली नदी का रूप लेती है, जो नारायणी/गंडक के रास्ते बिहार होते हुए अंततः गंगा में मिलती है।

नेपाल के हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार बुधवार की बाढ़ का कारण रसुवा में हुई बारिश नहीं थी। अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ के वास्तविक कारण और इससे हुए नुकसान की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी भोटे कोशी में दो विनाशकारी बाढ़ आई थीं, जिनमें कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button