उत्तराखंड

कालीमठ मंदिर की व्यवस्थाओं पर हक-हकूकधारियों ने उठाए सवाल, बीकेटीसी में स्थायी प्रतिनिधित्व समेत 12 सूत्रीय मांगें

रुद्रप्रयाग: प्रसिद्ध कालीमठ मंदिर में देश-प्रदेश के कई मुख्यमंत्री और विशिष्ट हस्तियां आस्था के साथ मत्था टेक चुकी हैं, लेकिन मंदिर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सड़क, शौचालय, श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था और मंदिर तक सुगम रास्ते जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने का आरोप कालीमठ मंदिर समूह से जुड़े पंचगाईं क्षेत्र के हक-हकूकधारियों ने लगाया है।

कालीमठ पंचगाईं समिति के अध्यक्ष लखपत राणा ने श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र कालीमठ मंदिर को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। इसी को लेकर समिति ने अपने पारंपरिक हक-हकूकों और मंदिर व्यवस्थाओं में प्रभावी भागीदारी की मांग उठाई है।

समिति ने बीकेटीसी के सदस्य प्रह्लाद पुष्पाण के माध्यम से 12 सूत्रीय मांगपत्र भेजा है। इसमें कालीमठ पंचगाईं क्षेत्र को बीकेटीसी में स्थायी प्रतिनिधित्व देने, मंदिरों से जुड़े नीतिगत निर्णयों में सहभागिता सुनिश्चित करने और सदियों पुराने पारंपरिक अधिकारों को संरक्षित करने की मांग की गई है।

लखपत राणा ने कहा कि पंचगाईं के हक-हकूकधारी सदियों से कालीमठ, कालीशिला और संबद्ध मंदिरों की सेवा, संरक्षण और धार्मिक व्यवस्थाओं में अपनी जिम्मेदारी निभाते आ रहे हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं में उनकी भूमिका और अधिकारों की अनदेखी उचित नहीं है। समिति ने कालीमठ पंचगाईं क्षेत्र से बीकेटीसी में एक सदस्य का स्थायी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की है।

इसके अलावा मंदिरों से संबंधित नीतिगत निर्णयों, कार्यकारिणी एवं उपसमितियों की बैठकों में पंचगाईं समिति को उचित प्रतिनिधित्व देने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले समिति से औपचारिक परामर्श की व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। मांगपत्र में कालीमठ मंदिर परिसर में पंचगाईं समिति के सुचारू संचालन के लिए बीकेटीसी की ओर से कार्यालय कक्ष उपलब्ध कराने और धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में समिति के पदाधिकारियों की आधिकारिक सहभागिता सुनिश्चित करने की मांग भी शामिल है।

समिति ने कालीमठ, कालीशिला, ऊखीमठ, जोशीमठ और बदरीनाथ समेत बीकेटीसी के अधीन मंदिरों में होने वाले वार्षिक एवं मौसमी उत्सवों और धार्मिक अनुष्ठानों में पंचगाईं की पारंपरिक भूमिका को मान्यता देने की मांग की है। साथ ही ऐतिहासिक दस्तावेजों, समझौतों और अभिलेखों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है।

मांगों में मां कालीमाई की दिव्य देवरा यात्रा को भव्य स्वरूप देने की मांग भी प्रमुख है। समिति के अनुसार करीब चार साल के अंतराल में आयोजित होने वाली यह यात्रा पंचगाईं क्षेत्र की सदियों पुरानी सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा है। समिति ने यात्रा की व्यवस्थाओं के लिए राज्य सरकार से प्रतिवर्ष बजट प्रावधान करने की मांग की है, ताकि यात्रा के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जा सकें।

समिति ने वर्ष 2026 में श्री केदारनाथ धाम और वर्ष 2027 में श्री बदरीनाथ धाम में प्रस्तावित मां कालीमाई की देवरा यात्रा के दौरान विशेष स्वागत और उचित प्रोटोकॉल की मांग भी की है। समिति का कहना है कि यह महज धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भगवान श्री केदारनाथ की अधिष्ठात्री शक्ति मां काली से जुड़ी सदियों पुरानी दिव्य परंपरा है। इसलिए यात्रा को उसी अनुरूप सम्मान और प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

इसके साथ ही बीकेटीसी के अधीन मंदिरों में कालीमठ पंचगाईं क्षेत्र के स्थानीय निवासियों को दर्शन, रोजगार और व्यवसाय के अवसरों में प्राथमिकता देने की मांग की गई है। मंदिर में ड्यूटी, धार्मिक दायित्व और अन्य जिम्मेदारी का निर्वहन करते समय किसी हक-हकूकधारी की मृत्यु या दुर्घटना होने पर संबंधित व्यक्ति और उसके परिवार को उचित क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान करने की मांग भी उठाई गई है।

समिति ने मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने और पंचगाईं प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक बैठक बुलाने की अपील की है। समिति पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि सरकार और बीकेटीसी आपसी संवाद, सम्मान और समन्वय के साथ समस्याओं का समाधान करेंगे, ताकि पंचगाईं जनता को अपने अधिकारों के लिए आंदोलन, धरना या प्रदर्शन का रास्ता न अपनाना पड़े।

बीकेटीसी के उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण ने कहा कि कालीमठ पंचगाईं समिति की मांगों को लेकर समिति के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर विचार-विमर्श किया जाएगा। जिन मांगों पर सहमति बनेगी, उन पर जल्द कार्रवाई किए जाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कालीमठ मंदिर के विकास को लेकर बीकेटीसी धरातल पर कार्य कर रही है।

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