उत्तराखंड

हरिद्वार में दो बाघों का शिकार, पैर काटकर फरार हुए तस्कर; वन गुज्जर गिरफ्तार

हरिद्वार। हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज के जंगल में शिकारियों ने दो बाघों को जहर देकर मार डाला और बेरहमी से उनके चारों पैर काट लिए। सजनपुर बीट, श्यामपुर कम्पार्टमेंट संख्या-09 में रविवार शाम सर्च ऑपरेशन के दौरान दोनों बाघों के शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। मृत बाघों में दो वर्षीय एक नर और एक मादा शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में जहरीला पदार्थ देकर शिकार किए जाने की आशंका जताई गई है।

वन विभाग के अनुसार, घटनास्थल पर एक मृत भैंस भी मिली। आशंका है कि आरोपियों ने भैंस के शव पर जहर छिड़ककर उसे चारे के रूप में इस्तेमाल किया। जैसे ही बाघों ने मांस खाया, उनकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने बाघों के पैर काट लिए, जिन्हें अवैध बाजार में बेचने की तैयारी थी। शव जंगल में ही छोड़ दिए गए।

कार्रवाई करते हुए वन प्रभाग ने श्यामपुर निवासी वन गुज्जर आलम उर्फ फम्मी को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के बाद घटनास्थल से करीब 150 मीटर दूर दूसरी मादा बाघ का शव भी बरामद हुआ, जिसके भी पैर कटे मिले। आमिर हमजा उर्फ मियां, आशिक और जुप्पी निवासी गुर्जर बस्ती, श्यामपुर फरार बताए जा रहे हैं। डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।

एक ही बाघिन के शावक थे दोनों, मां की तलाश में 50 वनकर्मी तैनात

वन विभाग ने बताया कि मारे गए दोनों बाघ एक ही बाघिन के शावक थे। बाघिन की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। उसकी लोकेशन ट्रेस करने के लिए श्यामपुर, चीला और रवासन क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में 10 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। करीब 50 वनकर्मियों और अधिकारियों की टीम लगातार सर्च अभियान चला रही है।

चीला रेंज से आते हैं अधिकांश बाघ

राजाजी टाइगर रिजर्व के 51 बाघों में से लगभग 70 प्रतिशत चीला रेंज में विचरण करते हैं, जो श्यामपुर क्षेत्र से सटी हुई है। हरिद्वार वन प्रभाग में दिखाई देने वाले अधिकांश बाघ इसी रिजर्व से आते हैं। वर्ष 2017 में चिड़ियापुर क्षेत्र में भी इसी तरह जहर देकर बाघ का शिकार किया गया था।

कॉर्बेट में दो पालतू हाथी लापता

इधर, रामनगर स्थित कॉर्बेट नेशनल पार्क के झिरना रेंज से दो पालतू मादा हाथी मंगलवार शाम रहस्यमय ढंग से लापता हो गए। पार्क प्रशासन को आशंका है कि दोनों हाथी जंगली झुंड के साथ चले गए हैं। घंटों की तलाश के बावजूद देर रात तक उनका सुराग नहीं मिल सका। दोनों हाथी गश्त के लिए तैनात थे।

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