
देहरादून: उत्तराखंड में डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की 27 सूत्रीय मांगों के समाधान न होने पर चल रहा आंदोलन अब तेज हो गया है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन कठोर कदम उठाने को बाध्य होगा।

2 फरवरी से जारी है प्रथम चरण का आंदोलन
महासंघ के अनुसार, 2 फरवरी 2026 से प्रथम चरण का आंदोलन शुरू किया गया था। इसी क्रम में 2 फरवरी को प्रदेश की सभी शाखाओं में तथा 10 फरवरी को सभी जनपदों में डिप्लोमा इंजीनियर्स की बैठकें आयोजित की गईं।
18 फरवरी को प्रत्येक जनपद मुख्यालय पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया और जिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया।
23 फरवरी को प्रदेशव्यापी रैली
महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष इं० आर० सी० शर्मा ने बताया कि शासन स्तर पर कोई सकारात्मक निर्णय न लिए जाने के कारण 23 फरवरी 2026 को प्रदेशव्यापी रैली आयोजित की गई। इस रैली में गढ़वाल और कुमाऊं मंडल से लगभग 4500 सदस्यों ने प्रतिभाग किया।
महासंघ ने कहा है कि यदि रैली के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। निर्माण कार्यों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की जिम्मेदारी शासन की होगी।
महासंघ की प्रमुख मांगें
महासंघ ने अपनी प्रमुख मांगों में वर्ष 2006 से लंबित वेतन विसंगति का समाधान कर ग्रेड वेतन ₹4600 प्रदान करने, 10, 16 और 26 वर्ष की सेवा पर समयबद्ध पदोन्नति सुनिश्चित करने तथा 1 जनवरी 2014 के बाद नियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं को 10 वर्ष पूर्ण होने पर ग्रेड पे ₹5400 (लेवल-10) देने की मांग की है।
इसके अलावा 1 अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त अभियंताओं के लिए पुरानी पेंशन बहाली, रिक्त पदों की शीघ्र पूर्ति, फील्ड में कार्यरत अभियंताओं के लिए सामाजिक सुरक्षा बीमा, विभागीय संरचना का पुनर्गठन तथा उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन देने जैसी मांगें भी शामिल हैं।
महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष इं० आर० सी० शर्मा ने कहा कि संगठन अपनी मांगों को लेकर एकजुट है और समाधान होने तक संघर्ष जारी रहेगा।



