इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल के विरोध में बिजली कर्मचारियों का ‘लाइटनिंग एक्शन’, देहरादून में गेट मीटिंग

देहरादून। इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में उत्तराखंड के बिजली अधिकारियों और कर्मचारियों ने सोमवार को आंदोलन तेज कर दिया। उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर राज्यभर में “लाइटनिंग एक्शन” के तहत गेट मीटिंग और विरोध सभाओं का आयोजन किया गया। देहरादून स्थित उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन मुख्यालय में भी कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर सरकार की प्रस्तावित नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
गेट मीटिंग में कर्मचारियों ने जताया विरोध
देहरादून में आयोजित सभा की अध्यक्षता इंजीनियर कार्तिकेय दुबे ने की, जबकि संचालन विनोद कवि ने किया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पेश करने की प्रस्तावित योजना पर गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया।

मोर्चा के संयोजक इंसारूल हक और अध्यक्ष इंजीनियर युद्धवीर सिंह तोमर ने कहा कि बिजली कर्मचारी संगठनों, किसान संगठनों और उपभोक्ता समूहों की ओर से इस बिल पर बड़ी संख्या में आपत्तियां और सुझाव दिए गए हैं, लेकिन सरकार बिना पर्याप्त चर्चा और लोकतांत्रिक परामर्श के इसे आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
राज्यभर में कार्य बहिष्कार और विरोध सभा

नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर राज्य के विभिन्न जल विद्युत परियोजनाओं, बिजलीघरों, उत्पादन इकाइयों, वितरण और ट्रांसमिशन संस्थानों में भी कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर गेट मीटिंग आयोजित की। कर्मचारियों का कहना है कि प्रस्तावित बिल बिजली क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे कर्मचारियों, किसानों और आम उपभोक्ताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
निजीकरण की नीति पर भी जताई चिंता
सभा में वक्ताओं ने बिजली क्षेत्र में तेजी से बढ़ाए जा रहे निजीकरण पर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना था कि वितरण कंपनियों के निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार राज्यों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को निजीकरण से जोड़ रही है, जो बिजली व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास है।
जल विद्युत परियोजनाओं की भूमि हस्तांतरण का विरोध
मोर्चा ने उत्तराखंड सरकार द्वारा उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की डाकपत्थर और ढालिपुर स्थित जल विद्युत परियोजनाओं की 76.73 हेक्टेयर भूमि को निजी क्षेत्र को आवंटित करने के निर्णय का भी विरोध किया। कर्मचारियों का कहना है कि इस निर्णय से लखवाड़, किशाऊ और यमुना बेसिन की अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं के विकास पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
मोर्चा ने बताया कि ऊर्जा निगमों में पिछले चार वर्षों से लंबित कार्मिकों की समस्याओं को लेकर 19 सूत्रीय मांगपत्र प्रबंधन को दिया गया था, लेकिन अब तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी के विरोध में आंदोलन की शुरुआत की गई है।
मोर्चा के अनुसार 13 और 17 मार्च को राज्यभर में गेट मीटिंग के माध्यम से विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर 27 मार्च को उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन मुख्यालय पर एकदिवसीय सत्याग्रह किया जाएगा। वहीं 6 अप्रैल को उत्तराखंड जल विद्युत निगम मुख्यालय पर भी सत्याग्रह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसके बाद मध्यरात्रि से पूर्ण हड़ताल की घोषणा की जा सकती है।
कर्मचारियों से एकजुट रहने की अपील
मोर्चा ने प्रदेश के सभी बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों से आंदोलन में एकजुट रहने की अपील की। उनका कहना है कि बिजली क्षेत्र, कर्मचारियों, किसानों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा।



