
देहरादून : अंतरराष्ट्रीय लेखक दिवस के अवसर पर देहरादून के थानो स्थित लेखक गांव में भव्य और गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में भारत सहित विश्व के 65 से अधिक देशों के साहित्यकार एक मंच से जुड़े, जो अपनी तरह का अनूठा आयोजन रहा।

कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित 26 वरिष्ठ लेखकों और विभिन्न देशों से ऑनलाइन जुड़े हिंदी व प्रवासी हिंदी साहित्यकारों को ‘लेखक सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वहीं प्रकाशित पुस्तकें लिख चुके 30 बाल रचनाकारों को ‘नवोदित लेखक सम्मान’ प्रदान कर उनके साहित्यिक योगदान का अभिनंदन किया गया।
बाल रचनाकारों को मिला सम्मान
सम्मानित बाल लेखकों में प्रणवी भारद्वाज, लावण्या कुशवाहा, देवांश गुप्ता, श्रेया चुग, आदित्य सागर, वैष्णवी, याशिका शर्मा, अर्घ्य, आद्रिका सिंह, दीप कौर, भव्य भगत, साक्षी गुप्ता, वृतिका सिंह, कविशा वर्मा, वृंदा, निधि अरोड़ा, रेहांश चौधरी, समृद्धि गुप्ता, मनन वर्मा और चैतन्य सिखोला सहित कई प्रतिभाशाली युवा लेखक शामिल रहे।
लेखक समाज का सजग द्रष्टा: डॉ. निशंक

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लेखक गांव के संरक्षक और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि लेखक समाज का सजग द्रष्टा और संवेदनाओं का सेतु होता है। उन्होंने घोषणा की कि लेखक गांव रचनाशील लेखकों को मंच प्रदान करेगा और उनके साहित्य के प्रकाशन के लिए कार्यशालाएं, संवाद सत्र और प्रकाशन योजनाएं भी शुरू की जाएंगी।
सृजनात्मक चेतना का केंद्र है लेखक गांव
लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने कहा कि लेखक गांव केवल एक स्थान नहीं बल्कि सृजनात्मक चेतना का केंद्र है, जहां शब्दों के माध्यम से संस्कृति और संस्कारों का संवर्धन होता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री कल्याण सिंह ‘मैती’ ने कहा कि लेखक गांव वैश्विक स्तर पर साहित्य की पहचान स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है और यह समाज को मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहा है।
विदेशों से जुड़े साहित्यकार
कार्यक्रम के दौरान काव्य-पाठ, साहित्यिक संवाद और वैश्विक हिंदी पर विचार-विमर्श के सत्र भी आयोजित किए गए। कुवैत, अमेरिका, यूके, कतर, सिंगापुर, स्पेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, श्रीलंका और चीन सहित कई देशों से प्रवासी साहित्यकार ऑनलाइन जुड़े और अपने विचार साझा किए।
समारोह का ऑनलाइन संचालन जर्मनी से डॉ. शिप्रा शिल्पी ने किया, जबकि ऑफलाइन संचालन डॉ. बेचैन कंडियाल और शिवम ढोंडियाल ने किया। अंत में संयोजक पूजा पोखरियाल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि लेखक गांव हिंदी साहित्य के वैश्विक संवाद को मजबूत करने के साथ-साथ नवोदित और बाल रचनाकारों को भी सृजन और प्रकाशन का सशक्त मंच प्रदान करने की दिशा में प्रतिबद्ध है।



