राष्ट्रीय

राजस्थान में कैंसर के बढ़ते मामलों का जल्द से जल्द निदान

सभी को नवीनतम चिकित्सा उपचारों की एक समान उपलब्धता और एक समर्पित राज्य कैंसर केयर फंड की तुरंत आवश्यकता है।

जयपुर: राजस्थान तेजी से बढ़ते कैंसर संकट का सामना कर रहा है, जहां स्तन, गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल), फेफड़ों और मुख के कैंसर प्रमुख स्वास्थ्य खतरों के रूप में उभर रहे हैं। आईसीएमआर–नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) के अंतर्गत जयपुर, अजमेर और बीकानेर की जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार, न केवल महिलाओं में स्तन कैंसर (Breast Cancer) के मामलों में बल्कि पुरुषों में मुख कैंसर के मामलों में भी चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। यह बढ़ती दर सरकारी अस्पतालों पर भारी दबाव डाल रही है, जो कई रोगियों के लिए निदान और उपचार का पहला और अक्सर एकमात्र केंद्र बने हुए हैं।
राष्ट्रीय अनुमान इस चिंता को और बढ़ा रहे हैं: आईसीएमआर–नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम 2022 की रिपोर्ट² के अनुसार, भारत में कुल कैंसर बोझ 2020 से 2025 के बीच लगभग 13% बढ़ने का अनुमान है। इस वृद्धि में मुख्यतः स्तन, गर्भाशय ग्रीवा, मुख और फेफड़ों के कैंसर हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में त्वरित बदलाव की मांग करते हैं।
नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ इन्फॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च (NCDIR) – नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि केवल वर्ष 2023 में राजस्थान में 11,488 नए स्तन कैंसर के मामले दर्ज किए गए और 4,274 मौतें इस बीमारी से हुईं। ये आंकड़े परिवारों, स्वास्थ्य प्रणालियों और समाज पर बढ़ते बोझ को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं।
डॉ. सुरेन्द्र बेनीवाल, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, (बीकानेर, राजस्थान) कहा: “राजस्थान में कैंसर का बोझ अब एक मूक समस्या नहीं रहा, बल्कि यह हमारे सामने खुलकर उभर रहा एक संकट है। मुख, फेफड़े, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर प्रमुख हैं, और इनमें से कई मामलों को जागरूकता, समय पर जांच और नवीनतम उपचार के माध्यम से रोका या जल्दी पहचाना जा सकता है। जल्द से जल्द निदान, नवीनतम चिकित्सा उपचारों की उपलब्धता, विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा इलाज, एवं नवीनतम उपचारों के प्रशिक्षण में निवेश करना — ये हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।”
नवीनतम उपचार, सटीक दवाएं और समग्र ऑन्कोलॉजी सेवाएं अभी भी सीमित केंद्रों में ही उपलब्ध हैं, जिससे अधिकांश मरीज इन सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। इन अत्याधुनिक उपचारों की उपलब्धता का विस्तार जीवित रहने की दर बढ़ाने, जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने और सभी के लिए न्यायसंगत एवं समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए बहुत आवश्यक है।
कैंसर पेशेंट्स एड एसोसिएशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अलका बिसेन ने कहा: “राजस्थान में स्तन, गर्भाशय ग्रीवा, मुख और फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते मामले गंभीर चिंता का विषय हैं। राज्य की कैंसर रजिस्ट्री से प्राप्त आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि अब तुरंत ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। यदि हमें इस चिंताजनक प्रवृत्ति को बदलना है और रोकथाम योग्य कैंसर मौतों से लोगों की सुरक्षा करनी है, तो जागरूकता, शीघ्र जांच और समय पर उपचार को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता बनाना होगा।
आयुष्मान भारत और राज्य-स्तरीय स्वास्थ्य योजनाओं में नेक्स्ट-जनरेशन थेरैपीज़ (Next-Generation Therapies) को शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही, एक समर्पित राज्य कैंसर केयर फंड की स्थापना जरूरी है ताकि उपचार में समानता और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को वित्तीय सुरक्षा मिल सके। राज्य के प्रत्येक जिले में उच्च-गुणवत्ता, अभिनव कैंसर उपचार सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए मजबूत सार्वजनिक-निजी साझेदारी (Public-Private Partnership) की आवश्यक होगी।

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