धराली आपदा के एक साल बाद कल्प केदार मंदिर की तलाश शुरू, 25 फीट मलबे में दबा है प्राचीन मंदिर

उत्तरकाशी। धराली में आई विनाशकारी आपदा के करीब एक वर्ष दो माह बाद ग्रामीणों ने मलबे में दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर के जीर्णोद्धार की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। नवरात्रि के पहले दिन रविवार को आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के आदेश और सानिध्य में मंदिर को खोजने के लिए खुदाई शुरू की गई। मंदिर समिति के अनुसार, इतिहास में चौथी बार कल्प केदार मंदिर को खोजने का प्रयास किया जा रहा है।
खुदाई शुरू करने से पहले विधि-विधान के साथ हवन और पूजा-पाठ किया गया। इसके बाद समेश्वर देवता की ओर से निर्धारित समय पर ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से खुदाई का काम शुरू किया। आपदा में मंदिर करीब 25 फीट मलबे के नीचे दब गया था।
कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार ने बताया कि देवता के आदेश के बाद ग्रामीणों ने अपने स्तर पर खुदाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने भी मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा की है। जल्द ही समिति का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा।
समिति के सदस्य संजय पंवार ने बताया कि बुजुर्गों के अनुसार, वर्ष 1803 में आई आपदा के दौरान बाढ़ में कल्प केदार मंदिर बह गया था। उस समय यहां करीब 204 मंदिरों का समूह था। इसके बाद वर्ष 1887 में यहां तीन मंदिर दिखाई दिए थे। वर्ष 1926 में आई आपदा के दौरान मुख्य कल्प केदार मंदिर आधा दब गया था, जबकि अन्य छोटे मंदिर बह गए थे। उस समय ग्रामीणों ने खुदाई कर मुख्य मंदिर को बाहर निकाला था।
करीब सौ वर्ष बाद पिछले वर्ष अगस्त में धराली में आई विनाशकारी आपदा के दौरान मंदिर एक बार फिर मलबे में दब गया। अब नवरात्रि के पहले दिन ग्रामीणों ने मंदिर को खोजने और उसके जीर्णोद्धार की उम्मीद के साथ खुदाई शुरू कर दी है।



