
देहरादून। देहरादून वन प्रभाग के कई क्षेत्रों में खतरनाक साल बोरर (हॉपलो) इन्फेक्शन के कारण करीब 19 हजार साल के पेड़ सूख चुके हैं। संक्रमण के तेजी से फैलने को देखते हुए वन विभाग ने इन पेड़ों के तत्काल कटान के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी है, ताकि आसपास के स्वस्थ पेड़ों को बचाया जा सके।
यह मामला थानो, आशारोड़ी और झाझरा रेंज का बताया जा रहा है, जहां इस कीट ने बड़े पैमाने पर साल के पेड़ों को अंदर से खोखला कर दिया है।
संक्रमण रोकने के लिए ट्री ट्रैप ऑपरेशन की तैयारी
वन विभाग संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए ‘ट्री ट्रैप ऑपरेशन’ चलाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत कुछ हरे पेड़ों को भी काटने की अनुमति मांगी गई है, ताकि कीटों को आकर्षित कर उन्हें नियंत्रित किया जा सके।
सीसीएफ वर्किंग प्लान डॉ. तेजस्विनी पाटिल ने बताया कि राज्य के अन्य वन प्रभागों में इस संक्रमण का प्रभाव कम है, लेकिन देहरादून डिवीजन में स्थिति गंभीर बनी हुई है। इसी कारण केंद्र से व्यापक कटान और नियंत्रण योजना की अनुमति मांगी गई है।
लकड़ी के लिए अलग डिपो बनाने की तैयारी
सूखे पेड़ों से निकली लकड़ी के भंडारण के लिए वन निगम को रायवाला और झाझरा में अलग डिपो स्थापित करने की योजना है। इसके लिए लगभग तीन हेक्टेयर वन भूमि भी आवंटित की जा रही है।
कीट नियंत्रण के लिए हरे पेड़ों की कटाई भी प्रस्तावित
ट्री ट्रैप ऑपरेशन के तहत करीब 3000 हरे पेड़ों को भी काटने की योजना है। इन पेड़ों को चार फीट लंबे लट्ठों में बदलकर पानी में रखा जाएगा, जिससे साल की लकड़ी की गंध से कीट आकर्षित होकर उन पर इकट्ठा हो जाएं और उन्हें नियंत्रित किया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन भी कारण
देहरादून वन प्रभाग के डीएफओ नीरज शर्मा के अनुसार पिछले वर्ष अत्यधिक बारिश और जलवायु परिवर्तन के कारण इस कीट का प्रकोप बढ़ा है। हॉपलो की मादा पेड़ों की जड़ों में अंडे देती है और लार्वा अंदर से लकड़ी को नष्ट कर देता है, जिससे पेड़ धीरे-धीरे सूखने लगते हैं।
वन अतिक्रमण पर एआई से निगरानी
इसी बीच वन भूमि अतिक्रमण पर रोक लगाने के लिए सरकार ने एआई आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। नोडल अधिकारी डॉ. पराग मधुकर धकाते ने अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 तक राज्य में लगभग 11,396.64 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण की चपेट में थी, जबकि जून 2024 से शुरू अभियान के तहत अब तक 1,560.31 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है।
वन विभाग ने कहा है कि इस पूरे मामले में केंद्र की अनुमति के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी और प्राथमिकता वन क्षेत्र को बचाने की है।



