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जनगणना अधिसूचना जारी होते ही उत्तराखंड की प्रशासनिक सीमाएं सील, तीन चरणों में होगी गणना

देहरादून। केंद्रीय गृह मंत्रालय से जनगणना की अधिसूचना जारी होते ही उत्तराखंड की प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाएं सील कर दी गई हैं। अब जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रदेश में किसी भी जिले, तहसील, निकाय, पंचायत या वार्ड की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा।

अधिसूचना के बाद राज्य सरकार नए नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत का गठन नहीं कर सकेगी और न ही किसी गांव को नगर निकाय में शामिल किया जा सकेगा। यह कदम जनगणना के आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, ताकि सीमाओं में बदलाव के कारण जनसंख्या डाटा में किसी प्रकार का मिसमैच न हो। हालांकि, इस अवधि में सार्वजनिक सुविधाओं और सामान्य सरकारी कार्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

16 फरवरी से शुरू होगा प्रशिक्षण

जनगणना कार्य के तहत 16 फरवरी से चार्ज अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा।23 कर्मचारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।प्रदेश भर में 555 कर्मचारियों को फील्ड ट्रेनर बनाया जाएगा।फील्ड ट्रेनर 4,000 कर्मचारियों को सुपरवाइजर के रूप में प्रशिक्षित करेंगे। इसके बाद 30 हजार कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और 25 मार्च से 7 अप्रैल के बीच 30 हजार कर्मचारियों और 4,000 सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक बैच में 40 कर्मचारियों को तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

तीन चरणों में होगी जनगणना

उत्तराखंड में जनगणना तीन चरणों में संपन्न कराई जाएगी । पहला चरण 25 अप्रैल से 24 मई 2026 में होगा जिसमें मकान सूचीकरण एवं गणना शामिल है। दूसरा चरण 11 से 30 सितंबर 2026 को होगा जिसमें बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जनगणना होगी, ओर तीसरा 09 से 28 फरवरी 2027 को होगी जिसमें  अन्य क्षेत्रों में देशभर के साथ जनगणना की जायगी।

बर्फबारी वाले क्षेत्रों में अलग समय

राज्य के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में 11 से 30 सितंबर 2026 के बीच जनगणना की जाएगी। इसका कारण यह है कि सर्दियों में इन इलाकों के लोग अन्य स्थानों पर पलायन कर जाते हैं, जिससे सटीक गणना प्रभावित हो सकती है।

जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तराखंड की निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रदेश की सीमाएं सील हो चुकी हैं और यह व्यवस्था जनगणना पूरी होने तक लागू रहेगी।

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