भरसार विश्वविद्यालय में छात्रा की मौत के बाद छात्रों का प्रदर्शन, जांच समिति गठित; 15 दिन में देगी रिपोर्ट

पौड़ी गढ़वाल: वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार में छात्रा की मौत के बाद छात्रों में आक्रोश है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर स्वास्थ्य सुविधाओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कई मांगें कुलसचिव के सामने रखीं। मामले की जांच के लिए कुलसचिव ने जांच समिति का गठन कर दिया है। समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
छात्रों ने परिसर में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठाते हुए वार्डन और डिस्पेंसरी में तैनात फार्मासिस्ट को हटाने की मांग की। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। डिस्पेंसरी में सीमित उपचार व्यवस्था होने के कारण गंभीर रूप से बीमार छात्रों को बाहर के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रा की मौत के बाद विश्वविद्यालय में शोकसभा तक आयोजित नहीं की गई और सामान्य रूप से शिक्षण एवं शिक्षणेत्तर कार्य जारी रहे। इससे छात्र-छात्राओं में नाराजगी और बढ़ गई। प्रदर्शन के बाद कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट ने आक्रोशित छात्रों से वार्ता की।
करीब दो घंटे चली बैठक में छात्रों ने मृतक छात्रा के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने समेत कई मांगें विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखीं। छात्रों ने परिसर में 24 घंटे डॉक्टर और नर्स की व्यवस्था, आपात स्थिति के लिए चार एंबुलेंस, स्वास्थ्य केंद्र में पैथोलॉजी लैब, नियमित स्वास्थ्य शिविर और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की।
इसके अलावा छात्रों ने मेस की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण, बीमार छात्रों पर उपस्थिति का दबाव नहीं बनाने, बीमारी के दौरान छुट्टी लेने की प्रक्रिया सरल करने, छात्रावासों की व्यवस्थाओं में सुधार और जिम्मेदार कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी रखी।
छात्रों ने कुलसचिव और डीन छात्र अधिष्ठाता के साथ भी विभिन्न मांगों को लेकर वार्ता की। बताया गया कि बातचीत के दौरान कई मांगों पर सहमति बनी है। छात्रों का कहना है कि अब वे प्रशासन द्वारा सहमति के अनुसार कार्रवाई किए जाने का इंतजार करेंगे।
वहीं, कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट ने छात्रा की मौत को बेहद दुखद घटना बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में एक चिकित्सक की नियुक्ति की जाएगी और भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को विशेष रूप से मजबूत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि छात्रों की समस्याओं को लेकर बैठक की गई है और समाधान की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। पूरे मामले की जांच के लिए जांच समिति गठित कर दी गई है, जो 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
यह है पूरा मामला
दरअसल, शनिवार रात बीएससी हॉर्टिकल्चर चतुर्थ वर्ष की छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध मेडिकल सुविधा से उसका उपचार कराने का प्रयास किया गया। छात्रों का आरोप है कि वहां छात्रा को अपेक्षित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी। इसके बाद विश्वविद्यालय की एंबुलेंस से छात्रा को पाबौ अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
छात्रों का आरोप है कि पाबौ पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से अपनी एंबुलेंस उपलब्ध कराने से मना कर दिया गया। इसके बाद सरकारी एंबुलेंस की मदद से छात्रा को पौड़ी अस्पताल ले जाया गया। पौड़ी में उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे श्रीनगर रेफर किया गया।
छात्रों के अनुसार, श्रीनगर में भी छात्रा की तबीयत में सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद रविवार को उसे ऋषिकेश ले जाया गया। उपचार के दौरान रविवार को छात्रा की मौत हो गई। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके चलते छात्रा की मौत हुई। घटना के बाद से विश्वविद्यालय के छात्रों में आक्रोश है।



