अंकिता भंडारी प्रकरण पर सियासी संग्राम तेज, उर्मिला सनावर को कोर्ट का नोटिस; यूकेडी ने खून से लिखा ज्ञापन

देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को लेकर उत्तराखंड में सियासी घमासान तेज हो गया है। एक ओर सीबीआई ने अभिनेत्री उर्मिला सनावर को पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट के लिए सहमति की पुष्टि करने के सिलसिले में अदालत में पेश होने का नोटिस दिया है, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने राष्ट्रपति के नाम खून से ज्ञापन लिखकर कथित वीआईपी से जुड़े मामले में कार्रवाई की मांग उठाई है। कांग्रेस ने भी अंकिता को न्याय दिलाने के लिए सड़क से संसद तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
नार्को टेस्ट के लिए उर्मिला सनावर को अदालत में पेश होने का नोटिस
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी का मुद्दा उठाने वाली अभिनेत्री उर्मिला सनावर को 23 अक्टूबर को देहरादून की अदालत में पेश होना है। जानकारी के अनुसार, सीबीआई की टीम मंगलवार देर शाम सहारनपुर स्थित उनके घर पहुंची और उन्हें नोटिस सौंपा। उन्हें सुबह 10:30 बजे विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। यह प्रक्रिया पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट के लिए उनकी सहमति की पुष्टि से संबंधित बताई गई है।
यूकेडी ने खून से लिखा ज्ञापन, दुष्यंत गौतम को पद से हटाने की मांग
अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल ने प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति के नाम खून से ज्ञापन लिखकर भेजा। पार्टी ने दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल पद से हटाने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान भी चलाया।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार निरंकुश और तानाशाही रवैया अपना रही है। उन्होंने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने और मामले से जुड़े कथित वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
प्रदर्शन में यूकेडी जिलाध्यक्ष प्रताप चौहान, युवा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष कुलदीप बोरा, नीरज बिष्ट, ज्योति दानू, रवि वाल्मीकि, मोहन कांडपाल, मोहन सिंह नेगी, उत्तम सिंह बिष्ट, महेश चंद्र तिवारी, जानवी भाकुनी और करन पंत सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कांग्रेस बोली- अंकिता को न्याय मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए पार्टी सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन करेगी। उन्होंने भाजपा सरकार पर मामले में न्याय सुनिश्चित करने के बजाय संबंधित लोगों को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक कांग्रेस का विरोध जारी रहेगा।
प्रेसवार्ता के दौरान रागिनी नायक ने भाजपा सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए मामले से जुड़े एक नेता को संवैधानिक पद पर बैठाए जाने पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। रागिनी नायक ने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर वोट चोरी की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि तीसरे चरण में 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने उत्तराखंड में राजनीतिक बदलाव आने का भी दावा किया।
अंकिता भंडारी प्रकरण में कथित वीआईपी को लेकर राजनीतिक दलों के विरोध और बयानबाजी के बीच अब सभी की नजरें सीबीआई की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।



