पहाड़ में तैनाती से इनकार करने वाले डॉक्टरों पर गिरेगी गाज, दोबारा भर्ती रोकने की तैयारी

देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी डॉक्टर बनने के बाद पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती से इनकार करने वाले चिकित्सकों पर सरकार सख्ती करने की तैयारी में है। नियुक्ति मिलने के बावजूद ज्वाइन नहीं करने वाले डॉक्टरों को भविष्य में दोबारा सरकारी सेवा में भर्ती का अवसर नहीं देने का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके साथ ही नौकरी ज्वाइन करने के बाद बीच में छोड़ने वाले चिकित्सकों पर भी नियम लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए लगातार भर्ती की जा रही है, लेकिन चयनित चिकित्सकों के ज्वाइन नहीं करने से स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें बनी हुई हैं। हाल ही में करीब 250 एमबीबीएस डॉक्टरों का चयन किया गया था। इनमें से लगभग 76 डॉक्टरों ने अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। इस तरह करीब 30 प्रतिशत चयनित चिकित्सक अपनी तैनाती पर नहीं पहुंचे।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से चयनित डॉक्टरों को ज्वाइन करने के लिए तीन महीने तक का समय भी दिया गया था। इसके बावजूद सभी पदों पर नियुक्ति सुनिश्चित नहीं हो सकी। बताया गया है कि ज्वाइन नहीं करने वाले अधिकांश डॉक्टरों को पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती दी गई थी। ऐसे क्षेत्रों में सीमित सुविधाओं और व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण चिकित्सकों के सामने चुनौतियां आती हैं। इसके चलते कई डॉक्टर नियुक्ति स्वीकार नहीं करते, जबकि कुछ नौकरी ज्वाइन करने के बाद छोड़ देते हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए सरकार भर्ती नियमावली में बदलाव करने जा रही है। प्रस्ताव के तहत नियुक्ति मिलने के बाद ज्वाइन नहीं करने वाले डॉक्टरों को भविष्य की सरकारी भर्तियों से बाहर रखने की व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, नियमों में संशोधन के बाद ही इस व्यवस्था का अंतिम स्वरूप स्पष्ट होगा।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि डॉक्टरों की भर्ती नियमावली में बदलाव किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसे नियम तैयार करना है, जिससे चयनित डॉक्टरों के कार्यभार ग्रहण नहीं करने की समस्या पर रोक लगाई जा सके और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।
सरकार की इस पहल का उत्तराखंड चिकित्सा सेवा संघ ने भी समर्थन किया है। संघ के अध्यक्ष रमेश कुंवर के अनुसार, डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया में लंबा समय लगता है। ऐसे में चयनित चिकित्सकों के ज्वाइन नहीं करने से समय और संसाधनों की बर्बादी होती है। उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव से व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।



