दिल्ली में आयोजित 30वें विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और संत राजिन्दर सिंह महाराज के साथ दो लाख से ज्यादा लोग जुटे

• समापन सत्र में बीजेपी विधायक अशोक गोयल, विभिन्न धर्मों के नेता और 650 से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हुए, आठ दिनों में दो लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया।
• सम्मेलन के दौरान मानव कल्याण कार्यों के अंतर्गत 68वां रक्तदान शिविर, 43वां मुफ्त नेत्र जांच और मोतियाबिन्द सर्जरी शिविर और 23वां वस्त्र वितरण शिविर भी आयोजित किया गया।
नई दिल्ली : दिल्ली में 30वां विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन रविवार को संपन्न हुआ, जिसमें सावन कृपाल रूहानी मिशन के प्रमुख संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने अपना समापन संदेश दिया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्य अतिथि के तौर पर सम्मेलन के समापन सत्र में भाग लिया। उनके साथ बीजेपी विधायक अशोक गोयल और कई धर्मों के प्रतिष्ठित प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
समापन सत्र में संत राजिन्दर सिंह जी महाराज का 80वां जन्मदिन भी मनाया गया, जिसे। दुनिया भर में उनके अनुयायी अंतर्राष्ट्रीय ध्यान अभ्यास दिवस के रूप में मनाते हैं। सम्मेलन में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, स्विटजरलैंड, कनाड़ा और कई अन्य देशों से 650 से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हुए। आठ दिनों तक चले इस सम्मेलन में, 13 से 20 सितंबर के बीच कृपाल बाग और संत दर्शन सिंह जी धाम, बुराड़ी में हुए कार्यक्रमों में दो लाख से ज्यादा भाई-बड़नों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने अपने ध्यान को भीतर की ओर मोड़ने और ईश्वर से जुड़ने के लिए ध्यान अभ्यास को एक मुख्य जरिया बताया।
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कहा कि, जब हम अंतर्राष्ट्रीय ध्यान अभ्यास दिवस मना रहे हैं, तो इमें यह समझना चाहिए कि हम केवल शरीर या मन नहीं हैं, हम सभी ईश्वर के प्रेम और प्रकाश से भरी आत्माएं हैं। ईश्वर तक पहुँचने का रास्ता प्रेम का रास्ता है। उन्होंने आगे कहा कि, ध्यान भटकाने वाली चीज़ों से भरी इस दुनिया में, इमें ईश्वर से जुड़ने और जीवन के सच्चे मकसद “खुद को जानने और ईश्वर को पाने को पूरा करने के लिए अपने भीतर झांकना होगा।
दिल्ली की मुख्यमुंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने संत राजिन्दर सिंह जी महाराज को उनके 80वें जन्मदिन पर बधाई दी और ध्यान, शांति और मानवता की सेवा के प्रति उनके दशकों लंबे समर्पण की सराहना भी की। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि,संत राजिन्दर सिंह जी मह़ाराज के बारे में जितना ज्यादा मैं जानती हूँ, इंजीनियरिंग से आध्यात्मिकता तक की उनकी इस अद्भुत यात्रा से उतनी ही प्रभावित होती हूँ। वे एक उच्च शिक्षित संत हैं जो मानवता के लिए सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। दुनिया एक परिवार है वसुधैव कुटंबकम। महाराज जी पूरी दुनिया में आध्यात्मिक ज्ञान फैला रहे हैं और इंसानी एकता के लिए काम कर रहे हैं। उनकी द्विव्य शक्ति सभी लोगों को अपनी स्नेहपूर्ण देखरेख में आश्रय देती है। इम उनकी कृपा के लिए ईश्वर का धन्यवाद करते हैं।
विधायक अशोक गोयल ने कहा कि, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज विज्ञान और आध्यात्मिकता दोनों दुनियाओं का बेहतरीन संगम हैं, जो भारत में बहुत कम देखने को मिलता है। संत राजिन्दर सिंह जी महाराज का जन्म मानवता की सेवा के लिए हुआ है। उनकी करुणा, सादगी और विज्ञान व आध्यात्मिकता का सुंदर मेल बहुत दुर्लभ है। वे सच में लोगों को ईश्वर से जोड़ने वाले महापुरुष हैं। उनके जन्मदिन पर हम केवल उनका आभार ही व्यक्त कर सकते हैं।”
समापन सत्र में आदरणीया माता रीटा जी और पश्चिमी लोगों के एक समूह के साथ मिलकर गुरु नानक देव जी महाराज की वाणी से एक भावपूर्ण भजन “हम घर साजन आए” प्रस्तुत किया।
समापन सत्र में अनेक धार्मिक नेताओं और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भी ध्यान-अभ्यास और आध्यात्मिकता पर अपने विचार पेश किए।
महामंडलेश्वर स्वामी देवेंद्रानंद गिरि जी महाराज ने दुनिया भर में दिव्य सुगंध को फैलाने के लिए संत राजिन्दर सिंह जी की प्रशंसा की, जबकि श्री श्री भगवान आचार्य जी और गोस्वामी सुशील जी ने उनके दिव्य प्रकाश और आध्यात्मिक गुरु के महत्व के बारे में बात की। सैयद फरीद अडमद निजामी ने विज्ञान और आध्यात्मिकता दोनों के बारे में महाराज जी की समझ पर प्रकाश डाला, जबकि श्री विवेक मुनि जी ने मानवता और शांति के मार्ग में उनके योगदान को
मुख्य बताया। रब्बी एजेकिल इसाक मालेकर ने महाराज जी को प्रेम का सागर बताते हुए उनकी प्रशंसा की। सम्मानित आचार्य येशी फुंटसोक ने 80 वर्षो के प्रेम और करुणा के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और फादर रोड्रिग्स ने आध्यात्मिक जागृति और करुणा के बारे में बात की।
शिकागो से आए दो अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों, डॉ. जे लिंक्समैन और श्री मलिक होदारी ने उन्हें दया, त्याग और द्विव्य प्रेम की प्रतिमूर्ति बताया ।
सम्मेलन में 68वां रक्तदान शिविर, 43वां मुफ्त नेत्र जांच और मोतियाबिन्द सर्जरी शिविर और 23वां वस्त्र वितरण शिविर भी आयोजित किया गया। 30वें विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन के समापन के साथ ही वर्ष 1990 में शुरू हुए विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन (Global Conference on Mysticism) के तीन दशक पूरे हो गए। यह सम्मेलन प्रवचनों, ध्यान-अभ्यास की कार्यशालाओं और सेवा कार्यों के जरिए हजारों-लाखों लोगों का आध्यात्मिक विकास कर रहा है।



