हरिद्वार भूमि घोटाला: दो IAS अधिकारियों का निलंबन 6 माह और बढ़ा, नवंबर तक रहेंगे सस्पेंड

हरिद्वार। हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले में फंसे दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। राज्य सरकार के बाद केंद्र सरकार ने भी तत्कालीन हरिद्वार जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और तत्कालीन नगर निगम आयुक्त वरुण चौधरी का निलंबन अगले छह माह के लिए बढ़ा दिया है। इसके साथ ही दोनों अधिकारी अब नवंबर 2026 तक निलंबित रहेंगे।
यह मामला उत्तराखंड के चर्चित हरिद्वार भूमि घोटाले से जुड़ा है, जिसे राज्य के सबसे बड़े कथित भूमि घोटालों में गिना जा रहा है। करोड़ों रुपये के इस प्रकरण में सरकारी जमीन की खरीद और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। जांच के दायरे में आने के बाद दोनों अधिकारियों को वर्ष 2025 में निलंबित किया गया था।
एक वर्ष पूरा होने के बाद हुई समीक्षा
3 जून 2026 को दोनों अधिकारियों के निलंबन का एक वर्ष पूरा हो गया था। नियमानुसार उनके मामलों की समीक्षा की गई, लेकिन राहत मिलने के बजाय केंद्र सरकार ने निलंबन अवधि को छह माह और बढ़ाने का फैसला लिया। इससे संकेत मिलता है कि मामले की जांच अभी जारी है और सरकार इसे समाप्त मानने के पक्ष में नहीं है।
पीसीएस अधिकारी अजयवीर सिंह को भी राहत की उम्मीद कम
इस मामले में निलंबित पीसीएस अधिकारी अजयवीर सिंह के लिए भी राहत की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है। उनके निलंबन की समीक्षा बैठक अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन आईएएस अधिकारियों का निलंबन बढ़ने के बाद माना जा रहा है कि उनके मामले में भी जल्द राहत मिलना मुश्किल है।
54 करोड़ रुपये के कथित घोटाले पर उठ रहे सवाल
करीब 54 करोड़ रुपये के कथित भूमि घोटाले को लेकर सरकार ने विजिलेंस जांच कराई थी। विजिलेंस अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है, लेकिन जांच रिपोर्ट के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सबसे बड़ा सवाल कथित मनी ट्रेल को लेकर उठ रहा है। अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि करोड़ों रुपये का वित्तीय लेन-देन किन स्तरों से होकर गुजरा और इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही। विपक्षी दल और सामाजिक संगठन लगातार पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार का कहना है कि मामले की जांच अभी विभिन्न स्तरों पर जारी है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा। गृह सचिव शैलेश बगौली ने दोनों आईएएस अधिकारियों के निलंबन की अवधि छह माह बढ़ाए जाने की पुष्टि की है।
क्या है पूरा मामला?
हरिद्वार नगर निगम से जुड़े करीब 57 करोड़ रुपये के कथित भूमि घोटाले का मामला वर्ष 2025 में सामने आया था। आरोप था कि नगर निगम की जमीन से जुड़े लेन-देन में गंभीर अनियमितताएं हुईं। मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच कराई गई और प्रथम दृष्टया गड़बड़ियां मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।



