
हरिद्वार: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सात मार्च को होने वाले हरिद्वार दौरे के दौरान देश के तीन नए आपराधिक कानूनों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इस प्रदर्शनी के माध्यम से युवाओं और आम जनता को नए कानूनों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर सरकार की प्रमुख उपलब्धियों की झलक भी प्रदर्शित की जाएगी।
गृह मंत्री अमित शाह के हरिद्वार दौरे को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी की ओर से दावा किया जा रहा है कि कार्यक्रम में डेढ़ लाख से अधिक कार्यकर्ता पहुंचेंगे। वहीं सरकारी विभाग भी केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने की तैयारी में जुटे हुए हैं।
जानकारी के अनुसार सात से नौ मार्च तक हरिद्वार के बैरागी कैंप में न्याय संहिता विषय पर राज्यस्तरीय प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इस प्रदर्शनी में देश के तीन नए आपराधिक कानून—भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए)—को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।
प्रदर्शनी में इन नए कानूनों की प्रमुख विशेषताओं को सरल और प्रभावी माध्यमों से प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें समयबद्ध जांच और आरोप पत्र दाखिल करने की अनिवार्यता, शून्य प्राथमिकी और इलेक्ट्रॉनिक प्राथमिकी की व्यवस्था, सात वर्ष से अधिक सजा वाले अपराधों में अनिवार्य विधि-विज्ञान जांच, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों की वैधता, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए सख्त प्रावधान, संगठित अपराध, साइबर अपराध और आतंकवाद से संबंधित स्पष्ट दंड प्रावधान जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होंगी। इसके अलावा पीड़ित प्रतिकर योजना और संपत्ति की शीघ्र वापसी की व्यवस्था को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।
सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर सरकार की उपलब्धियों की झलक भी प्रदर्शनी में दिखाई जाएगी। विभिन्न विभागों की सफल योजनाओं को भी प्रदर्शनी के माध्यम से आम जनता के सामने रखा जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में राज्य सरकार द्वारा किए गए बुनियादी ढांचे के विकास, सड़क और संपर्क मार्गों के सुदृढ़ीकरण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, शिक्षा क्षेत्र में सुधार, निवेश को बढ़ावा देने, पर्यटन विकास, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए किए गए कार्यों को भी प्रमुखता से दर्शाया जाएगा।



