
देहरादून। दूसरे राज्यों से उत्तराखंड आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस की वसूली अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। हरिद्वार के नारसन बॉर्डर पर ट्रायल सफल रहने के बाद मंगलवार से हरिद्वार, देहरादून और ऊधम सिंह नगर जिलों में कुल 11 स्थानों पर ग्रीन सेस वसूला जाने लगा है। जल्द ही अन्य बॉर्डर चेक पोस्टों पर भी इसकी शुरुआत की जाएगी।
उत्तराखंड ऐसा पहला राज्य बन गया है, जहां सीमा पर वाहनों को रोके बिना ही ग्रीन सेस की वसूली की जा रही है। इसके लिए परिवहन विभाग ने बॉर्डर चेक पोस्टों और राज्य के अंदर कई प्रमुख स्थानों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए हैं। इन कैमरों की मदद से बाहर से आने वाले वाहनों के फास्टैग से सीधे ग्रीन सेस काटा जा रहा है।
राज्य में कुल 37 एएनपीआर कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग 18 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। अनुमान है कि ग्रीन सेस से उत्तराखंड को सालाना करीब 100 करोड़ रुपये की आय होगी।
ऐसे होगी ग्रीन सेस की वसूली
एएनपीआर कैमरे जैसे ही वाहन का नंबर ट्रेस करते हैं, सॉफ्टवेयर वाहन की श्रेणी निर्धारित करता है। यदि वाहन छूट की श्रेणी में नहीं आता है तो फास्टैग से ग्रीन सेस की राशि स्वतः कट जाती है। कटौती का एसएमएस वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेज दिया जाता है।
उप परिवहन आयुक्त शैलेष तिवारी ने बताया कि आने वाले कुछ महीनों में उत्तराखंड को अन्य राज्यों से जोड़ने वाली सभी प्रमुख सड़कों पर एएनपीआर कैमरे लगाए जाएंगे। ग्रीन सेस से प्राप्त धनराशि पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा और यातायात सुधार जैसे कार्यों में खर्च की जाएगी।
इन स्थानों पर शुरू हुई वसूली
नारसन, श्यामपुर, भगवानपुर, इमलीखेड़ा, रुद्रपुर, नादेही, सुतैया, तिमली, कुल्हाल, आशारोड़ी और धरमपुर में दूसरे राज्यों के वाहनों से ग्रीन सेस लिया जा रहा है।
इन वाहनों को ग्रीन सेस से छूट
सभी दोपहिया वाहन
उत्तराखंड में पंजीकृत वाहन
सभी राज्यों के सरकारी वाहन
एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड वाहन
सेना, अर्द्धसैनिक बल और पुलिस वाहन
कृषि कार्यों में प्रयुक्त वाहन
इलेक्ट्रिक, सीएनजी और हाइब्रिड वाहन
ग्रीन सेस लागू होने से राज्य सरकार को जहां एक ओर अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और यातायात व्यवस्था सुधारने में भी मदद मिलेगी।



