यूजीसी कानून के खिलाफ पर्वतीय जन विकास समिति ने मुख्यमंत्री के नाम विधायक को सौंपा ज्ञापन।

बिजनौर – ( अफजलगढ़ ) यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए कानून के विरोध में पर्वतीय जन विकास समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए उसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है। शुक्रवार को समिति के अध्यक्ष विनोद काला के नेतृत्व में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन क्षेत्रीय विधायक कुंवर सुशांत सिंह को सौंपा। इस दौरान समिति ने यूजीसी के नए नियम को संविधान विरोधी बताते हुए इसे भारतीय समाज को तोड़ने की साजिश करार दिया। समिति अध्यक्ष विनोद काला ने कहा कि दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के अधिकारों की रक्षा बेहद जरूरी है, लेकिन नियम बनाते समय सामाजिक संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी का नया कानून सामान्य वर्ग के उत्पीड़न का माध्यम बन सकता है, जिससे समाज में असंतोष और विभाजन की स्थिति पैदा होगी। उन्होंने कहा कि यूजीसी का मूल उद्देश्य भेदभाव को समाप्त करना होना चाहिए, न कि किसी वर्ग को असुरक्षित महसूस कराना। भारतीय न्याय संहिता में पहले से ही भेदभाव से जुड़े मामलों के लिए स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं, ऐसे में अलग से समता समिति गठित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। ज्ञापन में मांग की गई कि यूजीसी द्वारा लाया गया यह कानून तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि किसी प्रकार की समिति का गठन किया जाता है, तो उसका उद्देश्य केवल भर्तियों और पदोन्नति में आरक्षित वर्ग के चयन को सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि समाज में विभाजन पैदा करना। ज्ञापन सौंपने के दौरान पूर्व प्रधान विनोद कुमार काला, सुनील कुमार धस्माना,बालम सिंह, हरेंद्र सिंह गोसाई, प्रतीम सिंह रोतेला, विनय काला, रघुवीर सिंह बिष्ट, धीरज सिंह सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



