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पृथ्वी पर मंडरा रहा खतरा, उपग्रह के रूप में

ब्रह्माण्ड ज्ञान/ 1957 में जब पहला कृत्रिम उपग्रह स्पुतनिक-1 पृथ्वी की कक्षा में पहुँचा, तब अंतरिक्ष लगभग खाली था। उस दौर में केवल एक उपग्रह था और मानव को लगा कि पृथ्वी के चारों ओर जगह कभी खत्म नहीं होगी।

संचार, जीपीएस, मौसम, सैन्य निगरानी और सैटेलाइट-इंटरनेट जैसे कार्यों के लिये पृथ्वी की कक्षा में 2025 तक 14,000 से अधिक सक्रिय उपग्रह मौजूद हैं। लो-अर्थ ऑर्बिट अब सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाला क्षेत्र बन चुका है।

इस बढ़ती संख्या के साथ एक गंभीर खतरा भी बढ़ा है स्पेस डेब्रिस। खराब हो चुके उपग्रह और उनके टूटे टुकड़े तेज़ रफ्तार से घूमते हुए सक्रिय उपग्रहों के लिए जोखिम बन रहे हैं। वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि लगातार टकराव से केसलर सिंड्रोम जैसी स्थिति पैदा हो सकती है, जहाँ कक्षा उपयोग के लायक नहीं रहेगी।

आज अंतरिक्ष खोज के साथ-साथ जिम्मेदार उपयोग और नियंत्रण की माँग कर रहा है, वरना भविष्य की अंतरिक्ष तकनीक खतरे में पड़ सकती है।

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