उत्तराखंडदेहरादून

बस्ती बचाओ आन्दोलन का जिला मुख्यालय पर विशाल प्रदर्शन

देहरादून: पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुरूप आज सैकड़ों की संख्या में बस्ती बचाओ आन्दोलन के वैनर तले प्रभावितों जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया तथा जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री जी,मुख्य सचिव महोदय ,गढ़वाल आयुक्त को अपनी मांगों का ज्ञापन दिया ।इसके अलावा जिलाधिकारी एवं नगर आयुक्त देहरादून को भी ज्ञापन दिया गया ।
आज सैकड़ों की संख्या में बस्तीवासी लगभग 11 बजे गांधी पार्क राजपुर रोड़ पर एकत्रित हुए जहाँ सभा के बाद जलूस की शक्ल में घण्टाघर ,दर्शन लाल चौक ,तहसील चौक ,ईनाम उल्ला बिल्डिंग से होते हुऐ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे तथा बस्तियों की बेदखली ,एलिवेटेड रोड़ तथा डबल इंजन सरकार की गरीब विरोधी तथा अमीरपरस्त नीतियों के खिलाफ जोरदार की तथा नगरनिगम देहरादून द्वारा चुन चुन। कर लोगों को भेजे गये नोटिसों को निरस्त करने। की मांग की । जिलामुख्यालय पर विशाल प्रर्दशन में वक्ताओं ने कहा है कि बस्ती बचाओ आन्दोलन द्वारा पिछले फरवरी 025 से बस्तीवासियों के उत्पीड़न एवं बेदखली तथा एलिवेटेड रोड़ के खिलाफ निरन्तर संघर्ष चलाया जा रहा है ।आन्दोलन का मानना है कि
7 मई 2025 के सरकारी नोटिफिकेशन एवं नगरनिगम नोटिसों में केवल गरीब बस्तियों को लक्षित कर उन्हें अतिक्रमणकारी कहकर बेदखली के नोटिस भेजे गये हैं, जबकि अमीरों की संपत्तियाँ और सरकारी भवनों के नदी नालों में कब्जों का कहीं भी कोई जिक्र नहीं है।
वक्ताओं ने कहा है कि,गत निकाय चुनावों में माननीय मुख्यमंत्रीजी द्वारा बस्तीवासियों से “मालिकाना हक” और ” बेदखली न करने” का वादा किया था, पर अब उसी सरकार द्वारा हाईकोर्ट/एनजीटी के आदेशों के बहाने बेदखली की तैयारी की जा रही है।
अपने ज्ञापन बस्ती बचाओ आंदोलन द्वारा उत्तराखण्ड सरकार एवं प्रशासन को गरीब बस्तियों के अधिकारों की रक्षा हेतु प्रस्तुत किया गया है। आन्दोलन कि मुख्य मांगें और चिंताएं निम्न हैं:-
(1)रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना को रद्द करना:
– परियोजना को “गैरजरूरी” बताते हुए रद्द करने की मांग।
– नगर निगम द्वारा बस्तियों को भेजे गए नोटिस वापस लेने की अपील।
(2)*बस्तीवासियों को मालिकाना हक:
– चुनावों में मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए वादे के अनुरूप बस्तियों को भूमि के अधिकार दिए जाने की मांग।
(3.)विस्थापन और उत्पीड़न रोकना:
– हाईकोर्ट/एनजीटी के आदेशों के बहाने बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाई जाये ।
– गरीबों को “अतिक्रमणकारी” ठहराने के बजाय, अमीरों और सरकारी भवनों पर समान कार्रवाई की जाने चाहिए।
( 4)एलिवेटेड रोड रिस्पना-बिंदाल नदी के प्राकृतिक बहाव और पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचाएगी।
(5)बिना पुनर्वास योजना और मुआवजे के विस्थापन 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम और सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।
(6)नदी संरक्षण के नाम पर केवल गरीबों को निशाना बनाना अन्यायपूर्ण।
(7)एलिवेटेड रोड के बजाय सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था* मजबूत की जाए।
– बस्तियों में पानी, बिजली, सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ (“स्लम रिहैबिलिटेशन एक्शन प्लान” लागू करके)।
(8) बस्तियों में नशाखोरी और उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार तत्वों पर अंकुश लगाया जाए।
प्रदर्शन में संयोजक अनन्त आकाश ,जनवादी महिला समिति की प्रान्तिय महामंत्री दयमन्ति नैगि, जिलाध्यक्ष नुरैशा अंसारी ,जिलामंत्री सीमा लिंगवाल,मौहम्मद अल्ताफ ,जनवादी नौजवान सभा कै विप्लव अनन्त आकाश,एस एफ आई प्रदेश अध्यक्ष नितिन मलैठा,महामंत्री शैलेन्द्र परमार ,नरेंद्र सिंह ,रजनी यादव ,पंकज ,बिन्दा ,रणजीत ,शबनम ,सुरेशी ,कुसुम ,अंजलि ,अय्याज ,राजेन्द्र शर्मा ,अलाउद्दीन ,संजय भारती ,अदनान ,सरोज ,कान्ति ,इन्दु ,सुमित्रा रावत,तमरैज आदि प्रमुख थै ।

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