उत्तराखंडदेहरादून

लंदन में भगवान शंकर आश्रम का शुभारंभ

परदेस में सनातन धर्म का नया विस्तार

मसूरी (देहरादून)। आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन के तत्त्वावधान में लंदन में मसूरी के भगवान शंकर आश्रय की नई शाखा का शुभारंभ हुआ। जगद्गुरु प्रोफेसर पुष्पेन्द्र कुमार आर्यम जी महाराज ने भाद्रपद पूर्णिमा के पावन अवसर पर इस शाखा का उद्घाटन किया। कार्यक्रम का आरंभ दिव्य पुष्पार्चन से हुआ। गुरुदेव की वाणी में मंत्रोच्चार के मध्य असंख्य पुष्प अर्पित किए गए और विश्व कल्याण की कामना की गई। अनुष्ठान के पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। फिर गुरुदेव का प्रवचन सत्र आयोजित हुआ। कार्यक्रम में लंदन और आसपास के क्षेत्रों से आए शिष्यों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भाद्रपद पूर्णिमा के बाद ही पितृ पक्ष आरंभ होता है। अपनी जड़ों और पूर्वजों को स्मरण करने वाले इस समय में यह शुभारंभ और भी सार्थक बन गया। गुरुदेव आर्यम का उपदेश यह भी है कि ” हम अपनी जड़ों की ओर लौटें, इसी में हमारा एवं समस्त विश्व का कल्याण छिपा है।”

वर्ष 2012 में मॉरीशस से शुरू हुई यह यात्रा, भारत (वर्ष 2016) और स्विट्जरलैंड (वर्ष 2023) होते हुए लंदन पहुँची है। यूरोप महाद्वीप में यह आश्रम की दूसरी शाखा है। लंदन में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी संख्या निवास करती है। ऐसे में यह शाखा यूरोप भर के साधकों के लिए एक सशक्त आध्यात्मिक केंद्र बनेगी। गुरुदेव आर्यम का संकल्प है कि सनातन का संदेश हर उस व्यक्ति तक पहुँचे जो उसे खोज रहा है।

विदेश में बसे भारतीयों के लिए यह भगवान शंकर आश्रय की स्थापना विशेष महत्व रखती है। रोज़गार और सपनों के लिए लाखों लोग अपना देश छोड़कर दूर जा बसे हैं। वे वहाँ सफल हैं एवं सुरक्षित तो हैं, किंतु मन में घर की याद बनी रहती है। घर केवल एक स्थान नहीं होता। घर हमारी संस्कृति है। घर वे संस्कार हैं, जिनके बीच हम पले बढ़े। घर वह आरती है, वह मंत्र है, वह त्योहार है जो बचपन से हमारे साथ रहा। ऐसे में परदेस में भगवान शंकर आश्रय का खुलना एक बड़ी राहत है। यह केवल सनातन धर्म और वैदिक परंपराओं का प्रसार नहीं है, अपितु यह नए लोगों को इस संस्कृति से जोड़ने का प्रयास है। साथ ही यह उन लोगों की घर वापसी भी है, जो पहले से इस संस्कृति का हिस्सा थे।

अपने प्रवचन में गुरुदेव ने कहा कि सनातन धर्म की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता और समावेशिता है। यह किसी एक वर्ग या देश तक सीमित नहीं है। यह समस्त जीव जगत के कल्याण की कामना करता है। हमारे ऋषियों ने कहा है,
“सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥”
अर्थात सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों, सभी का कल्याण हो और कोई भी दुःख का भागी न बने।

उपनिषद में भी कहा गया है,
“अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥”
अर्थात यह मेरा है, वह पराया है, ऐसी सोच संकीर्ण मन की होती है। उदार हृदय वालों के लिए तो पूरी पृथ्वी ही एक परिवार है।

ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने बताया कि गुरुदेव आर्यम विश्व के कोने कोने में सनातन की ज्योति जला रहे हैं। लंदन आश्रम इसी संकल्प की एक और सुन्दर कड़ी है। आर्यम अष्टसूक्त का प्रथम सूक्त है, ” आर्यम शरणम् शुभमस्तु,” ‘आर्यम’ अर्थात् श्रेष्ठ की शरण में प्रत्येक जीव आए। गुरुदेव आर्यम श्रेष्ठता का उपदेश धर्म के मार्ग से प्रशस्त कर रहे हैं। वैदिक अग्निहोत्र एवं पुष्पार्चन, यह केवल ईश्वर आराधना की पद्धतियाँ भर नहीं, बल्कि स्वयं के रूपांतरण की विधि हैं।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में श्रीमती सुमन शर्मा, माधव शर्मा, सुजाता शर्मा, सुमिता फाटक , श्रीनिवास फाटक,नवीन सिक्का, प्रियंका सिक्का, उदय राज चौधरी, भावना त्रिवेदी , ढिलान त्रिवेदी,जाईना, भारत,फ़राह,जिम, जूली,मीतेश रावल, भूमि रावल, अयान रघुवंशी , दीप्ति, चिची, विजय आदि ने भाग लिया ।

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